इंटरनेट खबर

कर्ज वापसी में असमर्थ Reliance Communications ने सरकार से माँगी आर्थिक मदद

दूरसंचार क्षेत्र काफ़ी दबाव में नज़र आ रहा है | यह कोई रहस्य की बात नहीं है, और अब Reliance Communications नियामकों और सरकार से कुछ कदम उठाने और ऋणों से निपटने में मदद करने की गुजारिश कर रहा है | कंपनी ने नियामकों को दूरसंचार उद्योग की सहायता के लिए अनुरोध किया है, जो 7.5 लाख करोड़ के कर्ज के तहत पीड़ित है |

Reliance Comm. खुद अपने ही 44,000 करोड़ के कर्ज के तहत पीड़ित है | यह ख़बर सार्वजानिक करने के बाद ही कंपनी के शेयरों में 20 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज़ की गयी, और इनकी कीमत 20 रूपये तक पहुँच गयी है | कंपनी 10 से ज्यादा बैंकों के साथ ऋण चुकौती के मामले में पीछे हो गयी है |
कारोबार शुरू होने के बाद से पहली बार कंपनी को नुकसान हुआ है, और यह कुल राशि 1285 करोड़ रुपये है |

दरअसल, कई बैंकों ने अपनी संपत्ति की किताब में Reliance Communications को Special Mention Account के रूप में भी वर्गीकृत किया है, जिसका अर्थ है कि वे अपने ऋण को गैर-प्रदर्शनकारी मानते हैं। रेटिंग एजेंसियों​ज जैसे CARE और ICRA ने हाल के दिनों के प्रदर्शन के चलते कंपनी के बॉन्ड मूल्यांकन को भी घटाया है | कंपनी ने कहा है कि वह Aircel और Brookfield Management संबंधी दो सौदों से प्राप्त आय से 25,000 करोड़ रुपये का भुगतान और प्रीपेमेंट करेगी |

कंपनी ने 30 सितंबर तक भुगतान करने का वादा किया है | जहाँ एक सौदे में Reliance, Aircel और MTS के बीच विलय शामिल है, वहीं कंपनी Brookfield को अपना 51 प्रतिशत हिस्सा बेच रही है |

दूसरी दूरसंचार कंपनियों के समान, Reliance 2016 में चौथी तिमाही में निराशाजनक रही और कुल मिलाकर इसे 966 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ | अनिल अंबानी की अगुवाई वाली कंपनी अब अपने भविष्य को लेकर क्या क्या क़दम उठाती है, यह अवश्य ही देखने योग्य होगा |

नई तकनीकों और विचारों के समायोजन को तलाशता मुसाफ़िर, जिसका मानना है कि उद्यमशीलता और प्रोद्योगिकी मिलकर ही विकास और विस्तार का अवसर प्रदान करतीं हैं |

Add Comment

Click here to post a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन