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Facebook ने कोर्ट से कहा, ‘उपभोक्ताओं को अगर पसदं नहीं तो न करें WhatsApp का उपयोग’

Facebook की WhatsApp में निजिता पर लंबे समय से चलती आ रही चर्चा को लेकर दो भारतीय छात्रों ने उच्चतम न्यायालय में जो पेटिशन फ़ाइल करी थी, उसके उत्तर में Facebook सलाहकार के के वेणुगोपाल ने नियायाधीशों की एक बेंच को कहा, “जिन्हें हमारी नयी निजिता पॉलिसी, उनके हक़ों को छीनती हुई लग रही है, वे इस मंच को छोड़ सकते हैं। हमने उपभोक्ताओं को Facebook व WhatsApp से अपना अकाउंट हटाने की पूरी आज़ादी दी हुई है”।

केस के बार में बता दें कि ये दुनिया भर में चल रहे उन कयी केसों में से एक है, जो कि Facebook लड़ रही है, पिछले वर्ष से, जब से उन्होंने अपनी निजिता पॉलिसी में बदलाव लाकर Facebook को WhatsApp के उपभोक्ताओं के डेटा पर पूरा हक़ दे दिया है।

भारतीय केस में, दो भारतीय छात्रों, कर्मान्य सरीन सिंह और श्रेया सेठी ने उच्चतम न्यायलय में एक पेटिशन फ़ाइल करी, इस बदलाव को लेकर, जो कि Facebook द्वारा WhatsApp के अधिग्रहण के चंद महानों में आ गया था। इस पॉलिसी बदलाव में, एक नियम ये भी है, कि WhatsApp, अपनी नयी मालिक, Facebook के साथ सारा डेटा बांटेगी।

WhatsApp के बचाव में, उनके सलाहकार कपिल सिबल ने कहा कि मंच के सभी मेसेज व कॉल एंड-से-एंड इंक्रिप्ट हैं, जो कि पूरी तरह से निजिता सुनिश्चित करती है। पेटिशन के बारे में उन्होंने कहा, कि क्योंकि उपभोक्ता और WhatsApp के बीच का कॉन्ट्रैक्ट, पूरी तरह निजी होता है, तो ये पॉलिसी, उच्चतम न्यायलय द्वारा टेस्ट नहीं करी जा सकती है और ये पेटिशन चलने वाली भी नहीं है।

जहां सिबल ने इस बात को पूरी तरह समझाया, Facebook के सलाहकार के के वेणुगोपाल ने बहुत ही तीखे शब्दों में कह दिया:

जिन्हें हमारी नयी निजिता पॉलिसी, उनके हक़ों को छीनती हुई लग रही है, वे इस मंच को छोड़ सकते हैं। हमने उपभोक्ताओं को Facebook व WhatsApp से अपना अकाउंट हटाने की पूरी आज़ादी दी हुई है।

कुछ ऐसी ही निजिता परेशानियां, दुनिया भर में

WhatsApp की नयी डेटा शेयरिंग प्रथा को लेकर परेशानियां नयी नहीं हैं।

करीब छः महीने पहले, दिल्ली हाई कोर्ट ने एक आदेश जारी किया था, जिसके अनुसार, WhatsApp की निजिता पॉलिसी से 25 सितंबर के पहले पीछे हट जाने वालों के निजी रिकॉर्ड उन्हें डिलीट कर देने थे। कंपनी को 25 सितंबर से पहले एकत्रित डेटा को न उपयोग करने के लिये भी कहा गया था। परंतु WhatsApp ने Mashable को कहा कि कोर्ट के आदेश का उनपर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, क्योंकि इनकी डेटा सिंक करने वाली पॉलिसी रविवार के बाद ही चालू हुई है।

बाद में, The Tech Portal को भेजे गये मेल में इंस्टेंट मेसेजिंग कंपनी ने स्पष्ट किया:

WhatsApp, दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश का पालन करेगी। हम कोर्ट के आदेश के साथ चलते हुए ही अपनी निजिता पॉलिसी और टर्म अपडेट करेंगे। कोर्ट का उपभोक्ता चुनाव व अनुमती पर ज़ोर देना सराहनीय है।

इस समय WhatsApp और उनकी मालिक Facebook, दोनों ही दुनिया भर में इस पॉलिसी को लेकर कोर्ट केस व कानूनी लड़ाइयां देख रही हैं। उदाहरण स्वरूप, युरोपी कमिशन ने इस निर्णय को सिरे से खारिज कर दिया है। परंतु कंपनी उस मुद्दे में निर्णय कि ओर बढ़ रही है, जैसा कि Facebook के साथ हो रही निजिता पॉलिसी चर्चा के प्रमुख युरोपी कमिशन नियंत्रक इर्विन डिक्सन ने बताया। पहले एक बयान में डिक्सन ने कहा था:

मेरा मानना है कि उपभक्ताओं को पार्टियों – Facebook और WhatsApp – द्वारा उपलब्ध करायी गयी जानकारी और भी स्पष्ट हो सकती थी, और पार्दर्शी हो सकती थी, और साथ ही, और आसान शब्दों में भी हो सकती थी। हम इसके उपाय कि ओर काम कर रहे हैं।

सरकार कि ओर से, सरकारी वकील तुषार महता ने कहा कि सरकार भारतीय संविधान के अंदर नागरिकों को उपलब्ध कराये गये हकों व स्वतंत्रता को बर्करार रखने के लिये तत्पर है और न्यायालय को बताया कि इंटरनेट आधारिक मेसेजिंग व वॉइस कॉलिंग मंचों के लिये नियंत्रक रेजीम जल्द ही जारी हो जायेगा।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने शुरवाती सुनवाई की तारीख, 15 मई को तय करी है, और इसमें निर्णायकों में जस्टिस दीपक मिश्रा, ए के सीक्री, अमितव रॉय, ए एम खानविल्कर और एम एम शांतनागौडर शामिल हैं।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन