MWC 2017 अंतरिक्ष

भारतीय शुक्र मिशन: ISRO ने आमंत्रित किये अंतरिक्ष आधारित प्रयोगों के प्रस्ताव

ISRO के धरती के जुड़वा ग्रह, शुक्र पर तकनीकी झंडे गाड़ने के प्लान को लेकर नयी अपडेट सामने आयी है। भारतीय अंतर्क्ष फ़र्म ने देश के वैज्ञानिकों व शोधकों से अंतरिक्ष में प्रयोगों के प्रस्ताव आमंत्रित किये हैं।

ISRO की ये मिशन लांच करने की संभावना 2020 के निकट बन रही है, परंतु इस प्रस्ताव निमंत्रण से हम वास्तविकता के एक कदम और निकट आ जाते हैं। इस मिशन का उद्देश्य, शुक्र के सतह, सतह के नीचे की प्रक्रियाओं व फ़ीचरों और शुक्र के पर्यावरण में बदलाव को समझना है। इसमें सौर रेडियेशन व सौर हवा के संबंध में शुक्र का एवल्यूशन व इंटरैक्शन शामिल है।

इसे ISRO के लिये एक बहुत बड़ा बेरेक बताते हुए एक वैज्ञानिक ने कहा:

अवसरों की घोषणा मात्र एक शुरवात है। स्टडी को फ़ाइनलाइज़ करने के बाद, एक प्रोजेक्ट को प्रेज़ेंटव मान्य किया जायेगा। फॉर्मल रूप से ये मिशन 2020 तक हो यही संभावना है।

ISRO का मानना है कि धरती व शुक्र, दोनों का ही जनन 4.5 बिलियन वर्षों पहले हुआ था, और दोनों में ही बहुत सी समानताएं हैं। अगर सफलहुआ, तो ये मिशन भारते के लिये गर्व का एक और सबब बन जायेगा।

इसमिशन के लिये उपग्रह की पेलोड क्षमता 175 किलोग्राम और 500W ऊर्जा होगी। शुक्र के आस-पास का ऑर्बिट 500×60,000 km होगा, जो धीरे-झीरे कम होता जायेगा। शुक्रको जाने वाला ये उपग्रह सूर्य व शुक्र के संबंध को समझने में हमारी सहायता करेगा, और उसी से धरती व शुक्र का संबंध भी।

ISRO ने इन प्रयोगों ते प्रस्तावों के लिये वैज्ञानिकों को 19 मई की आखिरी तारीख दी है। शुक्र के इस मिशन को ग्रांट प्राप्त करने के लिये एजंयी कि ओर से एक कारण बताया गया है। भले ही बगल से उड़ने वाले और लैंडर मिशनों के साथ 60 के दशक से शुक्र को समझने का प्रयास रिया जा रहा है और ये मिशन इन्ही की जानकारियों में और तथ्य जोड़ेगा।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन