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Amazon के नक्शेकदम पर चलते हुए, Flipkart एक बार फिर कर रहा है ‘भारतीय किराने क्षेत्र’ का रुख

कुछ हफ़्ते पहले, Amazon ने देश में कई स्टोर स्थापित करने के साथ, भारत के खाद्य खुदरा क्षेत्र को लक्षित करते हुए 500 मिलियन डॉलर की निवेश योजना का विस्तृत विवरण दिया था | Amazon के फैसले के बाद, अब इसके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी, Flipkart ने शुक्रवार को यह घोषणा की कि उनकी कंपनी एक बार फिर से किराने के क्षेत्र में प्रवेश करने जा रही है | यह घोषणा Flipkart के सीईओ कल्याण कृष्णमूर्ति ने नई दिल्ली में एक TiE कार्यक्रम में की, जिसमें उन्होंने कहा,

“ जी हाँ !, हम किराने क्षेत्र में प्रवेश कर रहें हैं, भारत में खरीद की क़रीब 80% इकाईयाँ किराने से संबंधित होतीं हैं, यह $400-600 मिलियन का व्यापक बाजार है, इसलिए हमें इसमें शामिल होना चाहतें हैं ”

अक्टूबर 2015 में, Flipkart ने अपनी खुद की किराने की इकाई का आगाज़ किया था, जिसको ‘Nearby का नाम दिया गया, यह एक प्रयोग के रूप में शुरू किया गया, जो काफ़ी प्रसिद्ध नहीं हो सका | यह सेवा विशेष रूप से बंगलौर में एक अलग ऐप के माध्यम से प्रदान की गई थी, जो 100000 से ज्यादा डाउनलोड तो हुई, लेकिन अपेक्षित आँकड़ा हासिल नहीं कर कर सकी। साथ ही कम मांग और मार्जिन की भारी कमी के कारण, Flipkart ने पिछले साल फरवरी में इसे बंद कर दिया था | यह भी कहा गया था कि ‘Nearby’ की स्थापना के बाद से, यह कंपनी के लिए बहस और विवादों का विषय बन गया था |

Flipkart के पहले प्रयास के दुखद अंत के बाद, यह कहा जा सकता है कि इस सेवा को नवीनीकृत करने का निर्णय बाजार में मौजूदा प्रतियोगिता के प्रभाव में लिया गया है। प्रतियोगिता से, हमारा मतलब केवल Amazon से ही नहीं है, दरसल ! जर्मनी का Metro Cash & Carry भी भारत के खाद्य खुदरा क्षेत्र में दिलचस्पी ले रही है |

चूंकि भारत सरकार खाद्य उत्पादों के कारोबार में 100% एफडीआई की अनुमति देती है, इसलिए अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी लगातार इस क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए नए अवसरों की तलाश कर रहे हैं | घर के प्रतिद्वंद्वियों के रूप में, Flipkart को किराना विक्रेताओं जैसे कि Big Basket और Grofers से प्रतिस्पर्धा का सामना करना होगा |

भारत में किराने के व्यवसाय की स्थिरता को परिभाषित करते हुए कृष्णमूर्ति ने कहा,

“ किराना क्षेत्र के लिए तीन मॉडल हैं, एक दैनिक खरीद, जिसमें औसतन बिक्री मूल्य (एएसपी) 300-400 रुपये से भी कम है, फिर एक है साप्ताहिक व्यवसाय मॉडल, जिसकी हालत पिछले मॉडल से कहीं सुखद है. लेकिन वहीं तीसरे व्यवसाय मॉडल का बाजार में 60-70% हिस्सा है जो मासिक स्तर पर औसतन 2,000 रुपये से अधिक ख़रीद को परिभाषित करता है, यह एक बहुत स्थायी व्यवसाय है ”

नई तकनीकों और विचारों के समायोजन को तलाशता मुसाफ़िर, जिसका मानना है कि उद्यमशीलता और प्रोद्योगिकी मिलकर ही विकास और विस्तार का अवसर प्रदान करतीं हैं |

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन