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‘Paytm’ या ‘Flipkart’ कर सकतें हैं Snapdeal का अधिग्रहण, कंपनी ने ख़बर को बताया निराधार

एक प्रेस वक्तव्य में Snapdeal ने, ‘Flipkart’ या ‘Paytm’ के साथ विलय की संभावना को “स्पष्ट रूप से अस्वीकार” कर दिया है | आज कुछ समय पहले ही Mint ने सूत्रों के हवाले से इस बात की इसकी सूचना दी थी कि Snapdeal अधिग्रहण संबंधी चर्चाएं करता नज़र आ रहा है, जिसकी कीमत 1.5-1.8 बिलियन डॉलर तक अनुमानित की गई है | हालाँकि यह कीमत अभी तक कंपनी द्वारा अर्जित कुछ निवेश से भी कम है |

एक वक्तव्य में Snapdeal की तरफ़ से यह कहा गया,

“ Snapdeal स्पष्ट रूप से इस तरह की कोई भी चर्चा के होने से इनकार करता है, यह जानकारी गलत और निराधार है, हम लाभप्रदता बनने की दिशा में हैं,और हमारी यात्रा में हम निर्णायक प्रगति कर रहे हैं और हमारे सभी प्रयास भी इसी दिशा में किए जा रहें हैं ”

इस स्टार्टअप ने अभी तक 2 बिलियन डॉलर से ज्यादा धन जुटाया है, जिनमें से अधिकांश $900 मिलियन SoftBank से प्राप्त किया गया है, Mint ने बताया था कि SoftBank अब Snapdeal की ओर से बिक्री की बात कर रहा है | हालांकि, वार्ता अभी भी प्रारंभिक अवस्था में है और कंपनी को कार्यरत बनाये रखने के लिए, निवेश दौर के रूप में अतिरिक्त 50 मिलियन डॉलर के निवेश की उम्मीद है |

इस अधिग्रहण सौदा के विकास के बारे में जानने वाले लोगों के अनुसार, Snapdeal के लिए दी जाने वाली कीमत 1.5 बिलियन डॉलर से 1.8 बिलियन डॉलर के बीच हो सकती है | 2016 में, वित्त पोषण दौर की स्थापना के समय, कंपनी का मूल्यांकन 6.5 बिलियन डॉलर था |

Alibaba समर्थित, Paytm का ई-कॉमर्स डिविजन Flipkart से कहीं अधिक उन्नत हैं | Flipkart पिछले साल के बाद से अतिरिक्त फंडिंग बढ़ाने के लिए संघर्ष कर रहा था, लेकिन हाल ही में ही यह 1 बिलियन डॉलर का निवेश अर्जित करने में कामयाब रहें हैं, और साथ ही एक बिलियन डॉलर और जुटाने की योजना बना रहें हैं | हालांकि, इस बात की अत्यधिक संभावना नहीं है कि कंपनी पहले से ही संघर्षरत यूनिट को प्राप्त करने के लिए, इन पैसों का एक बड़ा हिस्सा खर्च करे |

हालांकि, यदि ऐसा होता है, तो यह भारतीय स्टार्टअप पारिस्थितिक तंत्र में सबसे बड़ा अधिग्रहण सौदा हो सकता है | यह तो जग जाहिर है कि भारत में ऑनलाइन वाणिज्य क्षेत्र में लंबे समय में केवल दो या तीन बड़े ई-कॉमर्स कंपनियों ने ही मोर्चा संभाल रखा है |

हालांकि Snapdeal की बिक्री की खबर निश्चित रूप से नई है, लेकिन यह बिल्कुल आश्चर्यजनक नहीं है | कंपनी अभी तक के अपने सबसे कठिन समय से गुजर रही है | हालत यह है कि इसने एक शहर में अपने कार्यालय की जगह को एक सह-कार्यस्थल में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है | कंपनी ने हाल ही में 600 से ज्यादा कर्मचारियों को निकाला भी है और साथ ही कम से कम विपणन खर्च करने की कोशिश भी कीं हैं |

इसकी भुगतान प्लेटफार्म इकाई, FreeCharge की हालत भी कुछ सही नज़र नहीं आ रही है | हाल ही में ही अधिग्रहण के महज़ नौ महीनें बाद ही मुख्य कार्यकारी अधिकारी गोविंद राजन ने कंपनी का साथ छोड़ दिया और इसके साथ ही जेसन कोठारी को सीईओ के रूप में नियुक्त कर इस इकाई की पूरी ज़िम्मेदारी सौप दी गई |

नई तकनीकों और विचारों के समायोजन को तलाशता मुसाफ़िर, जिसका मानना है कि उद्यमशीलता और प्रोद्योगिकी मिलकर ही विकास और विस्तार का अवसर प्रदान करतीं हैं |

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन