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नासा ने ख़ोज निकाला ‘चंद्रयान -1’, अभी भी कर रहा है चाँद की परिक्रमा

भारत के पहले मानव रहित चंद्रमा मिशन, चन्द्रयान -1 को अंततः फिर से ढूँढ़ लिया गया है, जिसको काफ़ी समय से खोया हुआ मान लिया गया था | यह खबर नासा से द्वारा दी गई, जिन्होंने दावा किया कि उन्होंने इसरो की विरासत रहे इस उपग्रह को खोज निकाला है और यह आज भी चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा है |

आप शायद चंद्रयान -1 को, उस समय के भारत के सबसे महत्वाकांक्षी मिशनों में से एक के रूप में याद करते होंगें | यह मिशन वह था, जिसने इसरो को अंतरिक्ष अनुसंधान संगठनों के एक अभिजात वर्ग क्लब में शामिल कर दिया था, हालाँकि यह मिशन दो साल का का था और उम्मीद की गई थी कि इसके बाद वह चाँद की सतह पर उतर कर, कुछ अनमोल संसाधनों की खोज में मदद करेगा |

हालांकि, $79 मिलियन के इस उपग्रह प्रक्षेपण का एक साल बाद ही मुख्यालय के साथ संपर्क टूट गया था, और अब इसको खोया हुआ ही मान लिया गया था |

हालांकि, इसरो के वैज्ञानिक इस बात का दावा कर रहे हैं कि यह अंतरिक्ष यान आज भी चन्द्रमा के आसपास करीब 200 कि.मी. चांद की सतह के ऊपर, अपना चक्कर लगा रहा है | हम आपको बता दें कि इस अंतरिक्ष यान के साथ अंतिम संपर्क 29 अगस्त, 2009 में संभव हो पाया था | इस बीच यह तथ्य भी सामने लाया गया कि चंद्रयान -1 उपग्रहों के नजरिए से काफ़ी छोटा है, और इसका आकार क़रीब 800 मारुति कारों के बराबर माना जाता है |

सैटेलाइट को एक अंतर-ग्रह रडार का उपयोग कर खोजा गया है | रडार का वास्तविक उद्देश्य क्षुद्रग्रहों और संभावित तथ्यों की खोज में मदद करना है, हालांकि, इसने ख़ुद को एक खोये उपग्रह की खोज करने में सक्षम साबित किया है |

इस बीच, यह किस्मत का ही एक खेल रहा कि यह उपग्रह अभी भी उड़ रहा है | चांदनिधारित उपग्रहों के लिए आकाशीय क्षेत्र निश्चित रूप से अस्वास्थ्यकर है और इसमें औसत गुरुत्वाकर्षण पूल से अधिक क्षेत्र हैं, जो इसके दुर्घटनाग्रस्त होने की संभवनाओं को बढ़ाते हैं |

इसरो ने भविष्यवाणी की थी कि चंद्रयान को पृथ्वी के नजदीकी पड़ोसी की कक्षा में क्षय या दुर्घटना का सामना करना पड़ा होगा | हालांकि, ऐसा लगता है कि चंद्रयान -1 इस समय तक सही सलामत बना हुआ है |

इस बीच इसका मतलब यह नहीं है कि यह अभी भी कोई उपयोगी डेटा भेज रहा है, हालांकि, उन क्षमताओं को पहले से ही टोस्ट है। इस बीच, इसरो पहले से ही चन्द्रयान -2 को भेजने की योजना बना रहा है, इसका अगले साल चंद्रमा में दूसरा मिशन है |

नई तकनीकों और विचारों के समायोजन को तलाशता मुसाफ़िर, जिसका मानना है कि उद्यमशीलता और प्रोद्योगिकी मिलकर ही विकास और विस्तार का अवसर प्रदान करतीं हैं |

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन