खबर

ISRO ने GSLV Mark III के ऊपरी क्रायेजेनिक भाग का किया परीक्षण

भारतीय अंतरिक्ष शोध संस्थान ने अपने जियोसिंक्रोनस उपग्रह लांच वाहन के लिये भारत में ही विकसित किये गये क्रायेजेनिक ऊपरी भाग का सफल परीक्षण किया है। GSLV Mark III दरसल ISRO द्वारा मिशन में उपयोग करने के लिये विकसित किया गया एक लांच वाहन है।

ये परीक्षण, महेंद्रगिरी, तमिल नाड़ू में स्थित ISRO के प्रोपल्शन कॉम्पिलेक्स में किया गया था। इस 640 सेकेंड या तकरीबन 10 मिनट के परीक्षण के दौरान, C25 को अलग-अलग गतुयों पर चला कर परखा गया। ये C25 का दूसरा परीक्षण है और पहला, 50 सेकेंडों के लिये जनवरी में किया गया था।

इस परीक्षण के साथ, ISRO, Mark III की पहली उड़ान के बहुत करीब आ गया है। इसके हॉट टेस्ट के पहले, तीन CE20 इंजनें का विकास कर उन्हें समुद्र स्तर पर परीक्षित किया गया था। जहां इनके हॉट टेस्ट को 800 सेकेंडों तक चलाया गया, वहीं तीसरे इंजन को 50 सेकेंडों तक ऊंचाई पर परीक्षित किया गया।

अगर आपको पता न हो तो बता दें, हॉट टेस्ट दरसल प्रोडक्ट की गुणवत्ता, ऐफ़ीशियेंसी और चलाये जा सकने को परीक्षित करता है। ये बहुत ही महत्वपूर्ण थी, क्योंकि GSLV Mark III के अपनी पहली विकास उड़ान पर जाने से पहले का ये अंतिम परीक्षण था। ये वाहन, चार टन क्लास के उपग्रहों को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफ़र ऑर्बिट में स्थापित करने के लिये बनाया गया है।

अापकी जानकारी के लिये बता दें, जियोसिंक्रोनस ट्रांसफ़र ऑर्बिट दरसल एक अंडाकार ऑर्बिट है, जो कि कुछ किलोमीटर के न्यूनतम स्तर के मुकाबले, 35,784 किलोमीटर के उच्चतम स्तर तक विस्तृत है। इस ऑर्बिट में, लांच के समय के इंक्लिनेशन के बराबर का ही इंक्लिनेशन है।


बहरहाल, अॉक्सिजन व हाइड्रोजन को इंधन के रूप में उपयोग करने वाला C25, ISRO द्वारा अब तक का विकसित किया हुआ सबसे ताक़तवर इंजन है। इसका विकास बिलकुल भी आसान नहीं था, क्योंकि इसके केवल प्रोपेलंट 35 टन के हैं और उसे -353 डिग्री पर स्टोर करना था। परंतु शोध संस्थान ऐसा कर पाने में सफल रहा और अब वे GSLV Mark III के लांच के लिये तैयार हैं।द

Add Comment

Click here to post a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन