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YouTube ने स्वयं ही 1 बिलियन से भी अधिक विडियो को किया कैप्शन

जी हां, आपने बिलकुल सही सुना है। स्पीच पहचानने की तकनीक का लोगा मनवाते हुए, YouTube ने घोषणा करी है कि उनके विडियो मंच ने स्वयं 1 बिलियन से भी अधिक विडियो को कैप्शन किर दिया है। कंपनी ने ये भी घोषणा करी कि कैप्शन वाले विडियो रोज़ाना 15 मिलियन बार देखे जाते हैं।

अगर आपको पता न हो तो बता दें कि इस कैप्शन करने के प्रयास को Google की आवाज़ पहचानने की तकनीक ने पावर किया था, जो कि इस समय सब से बहतरीन है। स्वयं कैप्शन होने की तकनीक YouTube को पास 2009 में पहुंची थी। परंतु ये तकनीक उस समय शुरवाती दौर में ही थी और कैप्शनों में बहुत सा ग़लतियां होती थीं। अब Google की मशीन लर्निंग के कारण, ग़लतियां बहुत ही कम हो गयी हैं और Google का रहना है कि ये जल्द ही मनुष्य के स्तर पर पहुंचने वाले हैं।

कंपनी ने ये भी कहा कि वे पिछले कुछ वर्षों की महनत के कारण 50% तक सही रिज़ल्ट दे रहे हैं।

बहरहाल, YouTube एक आवाज़ पहचानने व कैप्शन करने की सेवा बनाने के लिये बहुत ही सही स्थान पर है। ये मंच बिलियनों विडियो का घर है और रोज़ इसमें कई और जोड़ दिये जाते हैं। इसी कारण से, कंपनी के पास बहुत सा ट्रेनिंग डेटा है और इतना बड़ा समाज है, उसे रिव्यू करने के लिये। और तो और उनके पास कई भाषाओं में डेटा है, जिससे कि वे अपने प्रयास को कई भाषाओं तक विस्तृत कर सकते हैं।

इस समाज द्वारा रिव्यू के तरीके का लाभ ये है कि उपभोक्ताओं द्वारा सही किये गये कैप्शन, वापस कंपनी के डेटाबेस में जा रहे हैं। ऐसा इसलिये, क्योंकि सिस्टम समाज द्वारा अपनी ग़लतियों के बारे में सीखता है और उन्हें दोहराता नहीं।

तो अपने विडियो को कैप्शन करते समय, YouTube, Google की कैप्शन सेवा को बहतर करती है। और क्योंकि ये Google है, तो आप ये मान सकते हैं कि यहां हुए परिवर्तन, इनकी अन्य सेवाओं तक फैल ही जायेंगे।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन