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Planet, एक ऐसा अमेरिकी स्टार्टप, जिसने ISRO के रिकॉर्ड तोड़ने वाले PSLV-C37 रॉकेट से 88 ‘डव’ उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे हैं

इस नये वर्ष में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का बहुत ही अच्छा आगाज़ हुआ है। भारत की एक वैश्विक अंतरिक्ष खलिलाड़ी बनने की चाह इतनी है कि ISRO द्वारा 108 उपग्रहों के लांच व उनकी बाहरी कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापना का जश्न पूरे देश ने मनाया।

जहां हम भारत की इतनी बड़ी सफलता का जश्न मना रहे हैं, एक नज़र उस अमेरिकी इमेजरी अपस्टार्ट Planet पर डाल लेते हैं, जिन्होंने उन 104 में से 88 उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे हैं। इस अपस्टार्ट ने इस मिशन के लिये अपने 88 ‘डव’ उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे, जिससे कि उनके 149 उपग्रहों का नेट्वर्क बन जाते, जो कि दूसरा सबसे बड़ा उपग्रहों का निजी नेट्वर्क बन जायेगा।

तो Planet आखिरकार है क्या?

ये अपस्टार्ट, दरसल एक पृथवी की इमेजिंग कंपनी है, जो कि धरती की बहतरीन इमेजिंग की ज़रूरत के चलते स्थापित हुई थी। जहां हमारे जैसे लोगों के लिये Google Maps (या Earth) बहुत ही सहायक होता है, वहीं कयी संस्थान व कंपनियां ऐसी हैं, जिन्हें हमारे गृह की एक डीटेल इमेजरी की ज़रूरत पड़ती रहती है। Planet, उपभोक्ताओं को यही उपलब्ध कराता है।

ऐसा कर पाने के लिये, कंपनी पिछले पांच वर्षों से प्रयास कर रही है। 2011 में Planet ने ठाना था कि वे हर दिन पृथवी के हर भाग की इमेजिंग करेंगे। कंपनी ने पाया कि इसके लिये 100-150 उपग्रहों की ज़रूरत होगी और वे उन्हें बनाने में लग गये। इस लांच के बाद, बाहरी कक्षा में उनके 144 उपग्रह हैं और अंततः उनका लक्ष्य पूरा हुआ।

हमें विश्वास है कि ऐसे डेटा के साथ, मानवता दुनिया के कुछ सबसे बड़ी चुनौतियों पर अपना प्रभाव डाल सके।

कंपनी ने लांच के उपलक्ष्य में कहा।

जैसा कि हम सभी को याद हो चुका है, ये लांच ISRO के PSLV से किया गया, जिसपर सभी को विश्वास था। इसे C37 रॉकेट से ऊपर भेजा गया था। एक साथ इन 88 उपग्रहों को Flock 3p का नाम दिया गया है।

Planet का ये ‘डव’ उपग्रह का पंद्रहवां लांच था और भारत के PSLV पर दूसरा। Flock 3p का ये लांच, जून 2016 में हुए Flock 2p के सफल लांच के कारण ही संभव हुआ है।

अपनी कक्षाओं में स्थापित होने के बाद, ये सभी 88 उपग्रह टुकड़ियों में बंट जायेंगे। कंपनी को उम्मीद है कि Flock 3p ऐने वाले तीन महीनों में समान्य रूप से इमेजिंग करने लग जायेंगे। Flock 3p के हर उपग्रह में – जो कि 13वां बिल्ड है – एक 200 Mbps का डाउनलिंक है और ये हर दिन करीब दो मिलियन किलोमीटर स्क्वेयर का डेटा एकत्रित करने की काबिलियत रखते हैं।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन