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भारत ने सफलतापूर्वक किया ‘इंटरसेप्टर मिसाइल’ का परीक्षण, देश नई रक्षा क्षमता से हुआ लैस

अपने रक्षा कार्यक्रम में और भी क्षमताएं जोड़ते हुए, भारत ने शनिवार को सफलतापूर्वक एक इंटरसेप्टर मिसाइल का परीक्षण किया। इससे देश के रक्षा बल को बहुत सा क्षमताएं मिली हैं, जिससे कि ऐसी तकनीकों विकसित करी जा सकें जो देश को मिसाइलों के हमलों से बचायें और उनका हवा में ही पता लगा कर उन्हें तहस-नहस कर दें।

मुद्दे पर बात करते हुए एक रक्षा अधिकारी ने कहा:

PDV (पृथवी रक्षा वाहन) धरती की सतह से 50 किलोमीटर ऊपर, बाहरी वायबमंडल में ही मिसाइल को इंगेज कर उसे तबाह करने के लिये एक मिशन था। PDV और दो चरणों वाली टारगेट मिसाइल त़का सफल परीक्षण किया गया।

इंटरसेप्टर को अब्दुल कलाम द्वीप से लांच किया गया था, वहीं असली हमले की नकल करने के लिये छोड़ी गयी मिसाइल, बंगाल की खाड़ी में खड़े एक जहाज से भेजा गया था। इस वास्तविकता के करीब परीक्षण में, एक स्वचलित रेडार आधारित ट्रैकिंग सिस्टम ने इस बैलिस्टिक मिसाइल को सफलतापूर्वक ट्रैक कर के रोक लिया।

भारत बहुत समय से बैलिस्टिक से सुरक्षा के लिये सिस्टम बनाने का प्रयास कर रहा है। इससे, देश इपने ऊपर हो रहे बैलिस्टिक मिसाइलों के हमलों से खुद की रक्षा कर सकेगा – परमाणू क्षमताओं वाली मिसाइलों से भी। क्योंकि पाकिस्तान व चीन, दोनों के पास में परमाणू क्षमताओं से लैस मिसाइलें हैं, ये तकनीक बहुत ही महत्वपूर्ण थी। DRDO के प्रयासों की बदौलत, भारत की इंटरसेप्टर मिसाइलें अब तैयार हैं।

इस ऐतिहासिक उपलब्धी पर वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा:

आज हमारे देश ने ऐसा मिसाइल बनायी है, जो कि हमलावर मिसाइल को हवा में ही तहस-नहस कर दे। दुनिया के केवल 4-5 देश ही ऐसा कर पाये हैं।

ऐसी मिसाइलें दुनिया के बहुत ही कम देशों पर उपलब्ध हैं परंतु ये जहां हैं, उन देशों को बहुत मज़बूत सुरक्षा उपलब्ध कराती हैं।

भारत में पहले से उपलब्ध हवाई रक्षा में दो प्रमुख हिस्से हैं- Air Defense Ground Environment System और Base Air Defense Zones। ये दोनों सिस्टम देश के महत्वपूर्ण स्थानों पर हमलों का पता लगा कर इंटरसेप्टर करने की क्षमता देते हैं। इन दोनों के साथ, ये इंटरसेप्टर मिसाइल, देश के लिये बहुत ही स़लाभप्रद होगी।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन