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Uber के सीईओ, अब ट्रम्प के ‘सलाहकार पैनल’ का हिस्सा नहीं

राष्ट्रपती ट्रंप का अप्रवासियों को बैन करना उन्हें भारी पड़ रहा है। पूरे तकनीक समाज को उनके विरुद्ध एकत्रित करने के अलावा, ये बिले सरकार की कोर कमेटी के सलाहकारों की विदाई का कारण भी बन गया है। इसी के चलते, Uber के सी.ई. ओ. ट्रैविस कलानिक ने ट्रंप के कोर वित्त सलाहकार पैनल को छोड़ दिया।

ये ख़बर बिलकुल उसी समय आयी है, जब कलानिक अगले दिन ट्रंप की वित्त काउंसिल मीटिंग में उनसे बैन के विषय में बात करने वाले थे। इस काउंसिल को पिछले वर्ष स्थापित किया गया था, ताकि राष्ट्रपती ट्रंप दुनिया के सबसे नामी व्यापारियों से जुड़े रह सकें और उनसे पॉलिसी व व्यापार संबंधित सलाह ले सकें।

परंतु इमिग्रेशन बिल के ज़रिये दुनिया के सात देशों के नागरिकों का US में आने कम से कम 90 दिनों के लिये बैन करने के उनके निर्णय पर उन्हें काफ़ी निंदा झेलनी पड़ी है और कलानिक को भी सलाहकार पैनल में होने के कारण ट्रंप का करीबी कहा जा रहा था। इस बैन के विरोध में सबसे पहले बोलने, चालकों के लिये फ़ंड अलग करने और सरकार के विरुद्ध कानूनी युद्ध छेड़ने के बाद भी, कंपनी को कुछ कारणों से विरोध का शिकार होना ही पड़ा।

पहला तो, कंपनी ने इस बैन के विरोध में टेक्सी युनियन द्वारा आयोजित करी गयी हड़ताल का हिस्सा ना बन कर उस समय के लिये सर्ज दाम भी हटा दिये। और दूरी कि लोगों को लग रहा था कि इस कमेटी में होने के कारण, Uber के सी.ई. ओ. ट्रैविस कलानिक राष्ट्रपती ट्रंप के करीबी हैं। इसी कारण से Uber की लोकप्रीयता में कमी आयी और उनके विरुद्ध सोशल मीडिया पर #DeleteUber कैंपेंन भी चलाया गया, जिसके कारण उनके प्रतिद्वंदी Lyft पहली बार App Store में उनसे आगे निकल गये।

उक्त दिये गये दोनों ही कारणों से, कलानिक के व्यापार को बहुत हानी झेलनी पड़ी। #DeleteUber कैंपेन के बाद, पहली बार उनके प्रतिद्वंदी Lyft पहली बार उन्हें पछाड़ कर उच्च 10 में पहुंच गये।

बहरहाल, कलानिक ने काउंसिल छोड़ दी है। उन्होंने एक अंदरूनी मेल में कहा:

राष्ट्रपति के सलाहकार पैनल में जुड़ने का मतलब ये नहीं था कि मैं उनका समर्थन करता हूं, परंतु उसे ग़लत ही समझा गया।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन