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‘विदेशी निवेश सीमाओं’ में राहत दे सकता है भारत: आर्थिक सचिव

भारत इस वर्ष के अप्रैल तक में घरेलु बाज़ार में अधिक विदेशी निवेश को आकर्षित करने की योजना बना रहा है |

यह जानकारी Bloomberg की एक रिपोर्ट के जरिये प्राप्त हुई है, जिसमें इस बात का जिक्र किया गया है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के प्रमुख के रूप में अपनी स्थिति को खोता देख, अब विभिन्न उद्योगों में सीमा छुट प्रदान कर, अत्यधिक विदेशी निवेश अर्जित करने संबंधी योजना पर कार्य कर रहा है |

आर्थिक मामलों के सचिव, शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को नई दिल्ली में एक साक्षात्कार में कहा,

“ इसके चलते सरकार भी विदेशी कंपनियों के अनुमोदन प्राप्त करने और निवेश प्रस्तावों को स्पष्ट करने संबंधी मंत्रालयों की प्रक्रियाओं को और सरल बनाने का प्रयास कर रही है ”

इसी के चलते सरकार ने 1990-युग के ‘विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड’ को समाप्त करने का भी फ़ैसला लिया है जो अक्सर नौकरशाही बाधाओं के चलते, परियोजनाओं और प्रस्तावों को धीमा करने संबंधी आलोचना झेलती रहती था |

हालाँकि इस बीच दास ने उन उद्योगों के नामों का जिक्र नहीं किया, जहां विदेशी निवेश सीमा में छूट दी जा सकती है, हालाँकि उन्होंने यह जरुर कहा कि,

“ यह विचार मुख्यतः इन प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने का है और इस पर अभी भी ‘सीमा की सहजता’ का विचार, सरकार के विचाराधीन है ”

भारत और चीन इस समय वैश्वीकरण संबंधी योजनाओं में अहम भूमिका निभा रहें हैं और साथ ही दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाली इन दो एशियाई अर्थव्यवस्थाओं को रोजगार के अवसर पैदा करने और बिक्री में वृद्धि बनाए रखने के लिए विदेशी कंपनियों की जरूरत है |

इस बीच जैसा की हम सब देख रहें हैं की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशासन में विदेशी पूंजी को लुभाने के लिए आर्थिक विकास को तवज्जों दी जा रही है |

दुनिया की दूसरे सबसे बड़े आबादी वाले देश में रक्षा विनिर्माण से लेकर बैंकिंग सहित दर्जन से अधिक उद्योगों में निवेश की सीमा और पाबंदियाँ कई बार असहज साबित होती नज़र आईं हैं |

हमें हाल ही में Apple के द्वारा विनिर्माण इकाई के स्थापन को लेकर किए गए प्रयासों और उनमें आई कई बाधाओं को भी देखा है, जिसके चलते यह तो साफ़ हो ही गया कि भारत में इन स्तरों में निवेश को लेकर आज भी अनेकों बाधाएं हैं |

खैर ! अब सरकार के द्वारा किए जा रहे इन प्रयासों के बीच देखना यह है कि क्या इन नीतियों से सच में हालत बदल पायेंगें या नहीं ? आप अपने विचार नीच कमेंट बॉक्स में हमें जरुर बताएं |

नई तकनीकों और विचारों के समायोजन को तलाशता मुसाफ़िर, जिसका मानना है कि उद्यमशीलता और प्रोद्योगिकी मिलकर ही विकास और विस्तार का अवसर प्रदान करतीं हैं |

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन