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Amazon $500 मिलियन के निवेश के साथ, भारतीय ‘ऑनलाइन पैकेज भोजन बिक्री’ क्षेत्र में कर रहा है प्रवेश

ऑनलाइन किराना/पैकेज भोजन बिक्री क्षेत्र को बदलने के लिये, Amazon ने स्थानीय रूप से बने भोजन आइटमों को स्टॉक कर के उन्हें बेचने के लिये DIPP को लाइसेंस के लिये आवेदन दिया है (ET से)। कंपनी ये एक भारतीय सब्सिडरी के ज़रिये करना चाहती है, वो भी आधे बिलियन डालॉर के शुरवाती निवेश के साथ।

इससे भारतीय कंपनियों पर कैसे दबाव पड़ेगा, ये समझाने के लिये आपको हम बता दें कि इस क्षेत्र पर BigBasket और Grofers का दबदबा है। और भले ही दोनों कंपनियों को निवेश प्राप्त हो चुके हैं, पर हम इस क्षेत्र को लेकर Amazon की संगीनता इससे परख सकते हैं कि वे शुरवात में ही इतना बड़ा निवेश कर रहे हैं, जितना BigBasket (~$247 के करीब निवेश) और Grofers (~165 के करीब निवेश) को मिला कर भी नहीं मिला।

और जैसा कि Amazon भारत से हम सब जान चुके हैं, Amazon अपने भारतीय अंगों में बहुत सा निवेश डालती है।

जो सूत्रों ने ET को बताया, उसके अनुसार, Amazon ने रीटेल व ई-कॉमर्स के निवेश देखने वे भारतीय डिपार्टमेंट DIPP को इसी संदर्भ में आवेदन भी दे दिया है। सूत्र ने बताया कि कंपनी अप्रूवल मिलने के छः महीनों के अंदर स्थानीय भोजन की बिक्री शुरू कर देंगे और आने वाले पांच वर्षों के दौरान $500 मिलियन की विशेष किया था।

जहां Amazon ने इस बात की पुष्टी नहीं करी, परंतु उनके वक्ता ने Economic Times को बताया:

हम भारत में मज़बूत भोजन सप्लाई चेन के लिये FDI को सरकार द्वारा बढ़ावा दिये जाने से बहुत उत्साहित महसूस कर रहे हैं। हमने इस विज़न को और भी बढ़ावा देने के लिये सरकार को साझेदारीे का प्रस्ताव दिया है।

अब भले ही इससे Flipkart जैसी प्रतिक्रिया निकले (सरकार से विदेशी प्रतिद्वंददियों ये बचाने के लिये अनुरोध) परंतु ये असल में सरकार के लिये एक बहुत बड़ी जीत ही होगी।

इसका कारण है कि भले ही सरकार ने पिछले बजट में भारत में बने प्रोसेस भोजन की बिक्री संभव करने के लिये 100% विदेशी निवेश की अनुमती दे दी थी, परंतु अभी तक किसी कंपनी ने इसका उपयोग नहीं किया है। Walmart के आगमन की ख़बरें बीच में खूब उड़ी थीं, परंतु अभी तक ऐसा हुआ नहीं है। Amazon के आगमन के साथ ये बदल सकता है, क्योंकि उन्हें पॉलिसी में बदलाव लाने के बाद भी अधिक विदेशी निवेश नहीं प्राप्त हुआ है।

साथ ही, Amazon के आगमन के साथ Walmart भी आ सकती है, क्योंकि हाल ही में US में भी इस वैश्विक ई-कॉमर्स कंपनी के साथ ऐसा ही हुआ।

अनेकों लोग ये भी कहा रहे हैं कि जब पॉलिसी में बदलाव लाने के बाद भी विदेशी निवेश उन्हें नहीं प्राप्त हुआ तो उन्होंने Walmart, Nestle, Heinz और थाईलैंड के CP Foods को भी आमंत्रित किया था।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन