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Harvard Business School में अध्ययन योग्य बनी, Paytm के सफलता की कहानी

Paytm, सबसे तेज़ प्रसिद्धी पाने वाला डिजिटल पेमेंट का एक मात्र मंच हैं और यह विषय अब देश भर में सबसे रुचिकर है| Harvard Business School (HBS) के Indian Research Centre (IRC) ने हाल ही में इस डिजिटल वॉलेट मंच को मात्र एक रिचार्ज मंच से payments bank platform में बदलने के सफ़र को प्रकाशित किया है|

इस केस स्टडी का नाम ‘Paytm: Building a Payments Network’ से हैं और यह Harvard के बाहर और अंदर दोनों ही जगह पढने के काम आते हैं| इसके सह लेखक, प्रोफेसर सुनील गुप्ता ने कहा की,

Paytm से पैसों का लेन-देन और भारत में इसकी प्रसिद्धी देश के डिजिटल भविष्य को दर्शाता है|

सुनील गुप्ता के अलवा HBS के Business Administration के प्रोफ़ेसर Carter ने भी इस स्टडी को करने में अपना पूरा सहयोग दिया| Carter ने साथ में ही Harvard के General Management Program को भी IRC के लिए बधाई दी|

Paytm के अलावा प्रोफेसर सुनील गुप्ता और प्रोफेसर दास नारायण ने मिलकर e-commerce मंच Flipkart पर भी अध्ययन किया| यह अध्ययन कम्पनी के अप्रैल 2016 में Ekart के बनने और उसके अलग हो जाने पर आधारित है|

Paytm के CEO, विजय शेखर शर्मा, ने अपनी ख़ुशी जताते हुए कहा की,

“हमारे लिए देश को और लोगों को डिजिटल बनाने का यह सफ़र अभी शुरू हुआ है| हमारे लिए यह गर्व की बात है हूम इतने बड़े संस्था में पढाये जाने योग्य बनें|”

Paytm लगातार देश को डिगिटल बनाने और लोगों को इससे जोड़ने का प्रयास कर रहा है| हाल ही में RBI से स्वीकृति के बाद इसने अपना Payments Bank एक महीने पहले खोला है|

कम्पनी ने अब तक 220 करोड़ से ज्यादा निवेश पा लिया है| जिनमें से 50 प्रतिशत विजय शर्मा की और से हैं| Indian Research Centre की बात कारें तो यह 2006 में स्थापित हुआ था| मुम्बई आधारित यह सेंटर तरह तरह के सर्वे और अध्ययन करता है|

 

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन