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मशीन लर्निंग का उपयोग कर Google करेगा, high-resolution वाली छवियों की डेटा जरूरतों में कटौती की कोशिश

पिछले साल नवंबर में Google ने RAISR नामक एक नई प्रोटोटाइप प्रौद्योगिकी से परिचय करवाया था, जो मशीन लर्निंग का उपयोग कर, कम रेसोलुशन छवियों को और अधिक विस्तृत तरीके से प्रदर्शित करने में मदद करती है |

लेकिन अब कंपनी ने RAISR तकनीक को अपनी ऑनलाइन सेवाओं के साथ एकीकृत करना शुरू कर दिया है | इसकी सहायता से उपयोगकर्ता Google+ पर बड़ी छवियों का इस्तेमाल करने के साथ ही, इस प्रक्रिया में डेटा भी बचा सकतें हैं |

Google के अनुसार,

“ इसकी सहायता से Google+ पर अधिक रेसोलुशन वाली छवियों के इस्तेमाल के दौरान उपयोगकर्ता करीबन अपना 75 प्रतिशत तक डेटा बचाते हैं ”

वर्तमान में यह तकनीक Google+ पर कई बिलियन छवियों द्वारा इस्तेमाल की जा रही है | जिसके चलते उपयोगकर्ताओं के बैंडविड्थ उपयोग में एक तिहाई तक की कमी आई है |

मशीन लर्निंग तकनीक भी कुछ इसी प्रकार कार्य करती है, जो कम रेसोलुशन छवियों को एक विस्तृत आयाम प्रदान करती है | जबकि पारंपरिक upsampling तय नियमों का उपयोग करता है जो नए पिक्सल के उपयोग के अवसरों पर आधारित होता है |

इसके साथ ही यह “edge features” की ओर भी विशेष ध्यान देता नज़र आता है, जो बड़े साइज़ की छवियों को ब्लर दिखने से बचाता है |

हालाँकि Google इस तरह की मशीन लर्निंग तकनीक के इस्तेमाल को लेकर अकेला नहीं  है | इसके पहले Twitter ने भी ब्रिटेन के एक AI स्टार्टअप, Magic Pony को ख़रीदा है, जो कम रेसोलुशन वाले विडियो के रेसोलुशन को उचित बनाए रखने का काम करता है |

नई तकनीकों और विचारों के समायोजन को तलाशता मुसाफ़िर, जिसका मानना है कि उद्यमशीलता और प्रोद्योगिकी मिलकर ही विकास और विस्तार का अवसर प्रदान करतीं हैं |

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन