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Qualcomm पर दक्षिण कोरिया के अविश्वास कानून तोड़ने के आरोप में $854 मिलियन का जुर्माना

अमेरिका की चिप बनाने वाली कंपनी Qualcomm पर दक्षिण कोरिया ने अविश्वास कानूनों के उल्लंघन और ग़लत व्यापार तरीकों के आरोप लगाते हुए उपनर 1.03 ट्रिलियन वॉन ($854 मिलियन) का जुर्माना लगा दिया है। Reuters ने कहा कि ये आज तक का सबसे बड़ा जुर्माना है, जो किसी भी कंपनी पर लगा है, और इससे Qualcomm बड़ी परेशानी में फस गयी है।

ये आरोप भी ऐसे समय पर आये हैं, जब दुनिया भर में स्मार्टफ़ोनों की खरीद में आये धीमेपन के कारण उनका व्यापार भी धीमी हो रहा है, और वे दुनिया भर में पेटेंट लाइसेंस कराने के आरोपों से लड़ रहे हैं। कोरियाई फ़ायर ट्रेड कमिशन (KFTC) ने बुधवार को कहा कि बाज़ार में श्रेष्ठ स्थान पर होने का नजायज़ लाभ लेते हुए कंपनी ने व्यापार के नियमों को कंपनियों से जबर्दस्ती मनवाया है।

संभव है कि कंपनी ने मोबाइल फोन विक्रेताओं को दी गयी वायरलेस तकनीक का लाइसेंस समझौता ग़लत तरीकों से बनाया है। नियंत्रत ने कहा कि उन्होंने उन निर्माताओं को चिपें बेचने से इनकार कर दिया, जिन्होंने इनकी शर्तों नहीं मानीं। इसके साथ ही, इन्होंने रॉयल्टी बटोरने का नया तरीका इजात किया है। ये केवल अपनी चिप पर रॉयल्टी लेने की जगह, पूरे हैंडसेट की रॉयल्टी बटोरते हैं।

इससे, इनके प्रतिद्वंददियों, जैसे कि Intel Corp, Samsung Electronics Co Ltd और MediaTek Inc के व्यापार पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है, जिन्हें ज़रूरी वायरलेस चिपें के लिये ज़रूरी लाइसेंस ही नहीं मिल रहे हैं। KFTC ने कहा कि इस कदम से उनका स्थानीय कंपनियों, जैसे कि LG और Samsung को बढ़ावा मिलेगा और चिब के बाज़ार में प्रतिद्वंद को भी। KFTC ने कुछ इंडस्ट्री भागीदारों की शिकायतें आने के बाद, 2014 में कंपनी की जांच करनी शुरू करी थी। इसी बारे में बात करते हुए KFTC के सेक्रेटरी जनरल शिन यंग सन ने कहा:

हमने इन कार्यों की जांच हमने करी क्योंकि Qualcomm पूरे बाज़ार में प्रतिद्वंद को सीमित कर रहा है।

इस जांच के बाद, नियंत्रक ने कंपनी को पेटेंट लाइसेंस कराने और अग्रीमेंटों पर दूसरे निर्माताओं से बात कर के समझौता करने का आदेश दिया है। जब तक अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, जब तक Qualcomm और फ़ोन निर्माण कंपनियों के संबंध पर क्या असर पड़ता है, ये तो समय ही बतायेगा, परंतु ये उनके बड़ी तकनीक कंपनियों, जैसे कि Apple, Intel, Samsung, व Huawei Technologies से संबंध में परिवर्तन तो लायेगा ही।

वहीं Qualcomm ने सियोल उच्च न्यायालय में केस कर दिया है ये कहते हुए कि ये आरोप न केवल सच्चाई से, परंतु असली नियमों से भी परे हैं। कंपनी ने जोड़ा कि वे आदेश रोकने और जुर्माने को हटाने का आवेदन भी देंगे (जो कि उन्हें 60 दिनों के अंदर देना है। कंपनी का बचाव करते हुए उनके अधिकारिक वाइस प्रेज़िडेंट व जनरल काउंसिल डॉन रोज़ेनबर्ग ने कहा:

Qualcomm का मानना है कि KFTC की रिपोर्ट तथ़्यों से बहुत परे है, बाज़ार की सच्चाइयों से भी और इसमें कंप्लीशन कानून को ग़लत तरीके से कोट किया है।

साथ ही, ये निर्णय Qualcomm के पेटेंट पोर्टफ़ोलियो पर कोई भी प्रश्न नहीं उठाता। Qualcomm ने इस क्षेत्र में बहुत से शोध व विकास संस्थान में बहुत पैसे लगाये हैं और इस क्षेत्र के अंदर बहुत सरारा विकास लाया है, तकनीक के नज़रिये से, जिससे कि पूरे विश्व को लाभ हो रहा है।

उन्होंने आगे जोड़ा कि KFTC ने लगातार Qualcomm को केस फ़ाइलें देने से मना किया है कि वे भी गवाहों से पूछ-ताछ कर सकें। अब ये न्याय व अपने पक्ष में निर्ऩय के लिये उच्च न्यायालय से आस लगाये बैठे हैं।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन