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SBI ने अपने मंच पर नेट बैंकिंग से हटाया “Paytm में डालें” का विकल्प

वर्ष की आखिरी तिमाही ने PayTM को बहुत तेज़ी से बढ़ते हुए देखा है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 500 और 1000 के नोटों का विमुद्रिकरण किये जाने ने कंपनी को इसमें बहुत सहायता दी। परंतु इस क्षेत्र में स्थापित नामों को भी इस नयी आई कंपनी की इतनी तेज़ बढ़ोत्तरी से धक्का ज़रूर लगा है। एक स्पष्ट बयान में, भारतीय स्टेट बैंक ने अपने नेट बैंकिंग मंच से पैसे PayTM में डालने का विकल्प हटा दिया है और अपने उपभोक्ताओं से स्टेट बैंक बडी का इस्तेमाल करने का अनुरोध किया है।

भारतीय स्टेट बैंक ने अपने अधिकारिक ट्विटर हैंडल से उक्त ट्वीट किया:

“PayTM मैं पैसे डलाने का विकल्प भारतीय स्टेट बैंक ने अपने नेट बैंकिंग मंच से हटा दिया है। उपभोक्ता स्टेट बैंक बडी मोबाइल वॉलेट का प्रयोग अपने Android व iOS डिवाइसों पर कर सकते हैं। आप स्टेट बैंक बडी में SBI नेट बैंकिंग से पैसे डाल सकते हैं।”

बैंक ने तो इस ख़बर की घोषणा भी नहीं करी थी, शायद इस लिये कि इसके बाद उपभोक्ताओं की नाराज़गी स्पष्ट होगी, और ये तब सामने आया जब एक उपभोक्ता ने कहा कि वो नेट बैंकिंग के माध्यम से अपने PayTM में पैसे नहीं डाल पा रहे हैं। फिर बैंक ने ऊपर दी गयी ट्वीट के ज़रिये उनका जवाब दिया और ये घोषणा करी कि उन्होंने अपने नेट बैंकिंग मंच पर PayTMमें डालने का विकल्प बंद कर दिया है।

परंतु उपभोक्ता इस कदम से खुश नहीं थे और SBI के ऐसे कदम पर अपने विचार व्यक्त करने से नहींं चूके। जैसा कि एक उपभोक्ता ने बहुत ही स्पष्ट तरूके से बयान किया:

स्टेट बैंक बडी का इंटरफ़ेस बहुत ही बेकार है। कृप्या इसे सुधारिये। @paytm बहुत बेहतर है।

PayTM ने इस कदम का जवाब SBI को कुछ इस अंदाज़ में दिया:

PayTM पर खुशियां मिलना निश्चित है। अगर हम आपकी उम्मीदों पर खरे न उतरें तो हमें ज़रूर बताइयेगा। #paytmkaro

SBI ऐसी प्रचार तकनीकों के लिये नया नहीं है और इन्होंने पहले PayTM के चीनी प्रभुत्व पर भी प्रश्न उठाया था और अपने उपभोक्ताओं को ई-बडी उपयोग करने के लिये भी कहा था। जो भी हो, इसका PayTM पर कोई असर नहीं रहा और इसका प्रचलन इनके आसान उपयोग की वजह से बढ़ते जा रहा है। साथ ही, विमुद्रिकरण के कारण भी।

लगता है कि SBI को दूसरों को लेकर बयानबाज़ी करने की जगह अपना मंच बहतर बनाने का प्रयास करना चाहिये, वरना उन जैसे मंझे हुए खिलाड़ी भी एक नयी कंपनी के आगे घुटने टेकने को मजबूर हो ही जायेंगे।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन