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EU न्यायालय ने UK के नये डेटा रिटेंशन नियमों को बताया बेहद दखलअंदाज़ी भरा

युनाइटेड किंग्डम के नये नियमों – जिनके अनुसार सरकार के पास खोज करने की ताकत के अलावा ये पूरी जानकारी रहेगी कि उनके लोग वेबसाइटों पर क्या देख रहे हैं – को बहुत ही निंदा झेलनी पड़ी है। नियमों को लेकर विरोध के बाद, यहां के उच्चतम EU न्यायालय ने भी इन नियमों के विरुद्ध निर्णय ले लिया है।

युरोपी युनियन कोर्ट ने कहा है कि जनरल व बिना विविधता के डेटा रखनेे वाला नियम, स्वयं EU न्यायालय के नियमों का उल्लंघन कर रहा है।

अगर आपको पता नहीं है तो हम आपको बता दें कि “स्नूपर चार्टर” के इन नियमों के अनुसार, सरकारी एजंसियों के पास आपके किसी भी डिवाइस को बैक करने (वो भी कानूनी तौर पर!) की अनुमती होगी और इसके अलावा सभी इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराने वालों को अपने उपभोक्ताओं का एक वर्ष पहले तक का डेटा भी सरकार को देना होगा। तो अगर आप UK में हैं, तो इसका मतलब है कि सरकार आपके सभी इंटरनेट कार्यों पर नज़र रख सकेगी।

न्यायालय के मुताबिक:

आम व बिना विविधता के डेटा रखनेे के राष्ट्रीय नियम के बहुत पहले ही EU कोर्ट का नियम आ चुका था। तो, सरकार द्वारा इस नियम के ऊपर अपना नियम लाना बहुत ही संगीन कार्य हो गया। ये बात कि उपभोक्ता का निजी जीवन बिना उनकी जानकारी के नज़रबंद रखा जायेगा। ऐसा करने की अनुमती, केवल संगीन अपराधों में ही दी जा सकती है, आम जनता के लिये नहीं।

युरोपी युनियन का मानना है कि राष्ट्रीय नियम उनके नियम से बड़े नहीं हैं, और अब, इस निर्णय से नाखुश लोगों को इन्होंने तगड़ी बैकिंग दे दी है। EU ने ये कहना भी याद रखा कि यदि कोई सरकार ISP, का डेटा देखना भी चाहे, तो उन्हें उसके लिये ठोस कारण चाहिये।

बहरहाल, इस समय ये मामला बहुत ही उलझा हुआ हो गया है। यहां तक कि ब्रिटेन के युरोपी युनियन छोड़ने तक की बात उठ चुकी है। परंतु अगर वे निकाल दिये जाते हैं (अगर जाते हैं!) तो कोर्ट के निर्णय पर प्रश्न उठ सकते हैं। परंतु अगर वे युनियन में रहने का निर्णय लेते हैं, तो उन्हें इस नियम को बदलना होगा।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन