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PayPal ने किया PayTM के विरुद्ध, ट्रेडमार्क चोरी करने का केस

वैश्विक भुगतान कंपनी PayPal ने, अपने भारतीय समकक्षी PayTM के विरुद्ध, अपना लोगो व ऐस्थेटिक डिज़ाइन करते हुए PayPal का कॉपी करने का इलज़ाम लगाया है। इस ख़बर को सबसे पहले TOI, ने उजागर किया था।

स्थानीय ट्रेडमार्क कार्यालय में कंप्लेन डालते हुए, PayPal ने कहा कि PayTM का ब्रांडिंग व डिज़ाइन, PayPal से अत्यधिक मेल खाती है। PayPal दोहरे नीले रंग में अपना ब्रांड दस साल से चला रहा है और उन्होंने इसे ट्रेडमार्क भी कर लिया है। इसी लिये, अमेरिकी कंपनी का कहना है कि PayTM का ट्रेडमार्क, “PayPal के साथ गुमराह करने की हद तक मेल खाता है”।

दुनिया भर में PayPal अपने दोहरे नीले रंग के लोगो और डिज़ाइन के लिये मशहूर है। और अब, कंपनी का कहना है कि PayTM ने उनकी लोकप्रीयता का लाभ उठाने के लिये उनके लोगो से लेकर सब कुछ कॉपी कर लिया है, यहां तक कि दोहरे नीले रंगों का शेड भी (अन्यथा क्यों वे खुद को किसी दूसरे ब्रांड से अलग करने के लिये कोई अलग डिज़ाइन नहीं अपनाते)। साथ ही, दोनों कंपनियां भी एक ही क्षेत्र में कार्य कर रही हैं, जिसका केंद्र इंटरनेट के ज़रिये डिजिटल भुगतान उपलब्ध कराना है। इसी को मद्देनज़र रखते हुए, PayPal की शिकायत में लिखा था:

लोगो में पहली इकाई गहरे नीले रंग में है और दूसरी हल्के नीले रंग में। साथ ही, दोनों लोगो ‘Pay’ के साथ शुरू होते हैं और उपभोक्ता का ध्यान दूसरी इकाई पर न जाकर केवल पहली पर जाता है। साथ ही, दोनों लोगो समान लंबाई के हैं। इन समानताओं से उपभोक्ता भ्रमित हो जाते हैं, क्योंकि PayPal की लोकप्रीयता भी अधिक है।

साथ ही, PayPal ने ये भी कहा कि वे 1999 से अनेकों शहरों में ये ट्रेडमार्क उपयोग कर रहे हैं, जिन सभी का नाम इस शिकायत में दिया गया है। और भारतीय भुगतान कंपनी अभी भी इसको अपना ट्रेडमार्क बनाने के लिये प्रयासरत है। भारतीय ट्रेडमार्क नियमों के अनुसार, कोई भी कंपनी यदि ट्रेडमार्क के लिये आवेदन दे रही है तो उसे इसकी समाजिक घोषणा करनी होगा और यदि किसी को इससे कोई आपत्ति है तो वे चार महीनों के अंदर उसे दर्ज कर सकते हैं। PayTM ने जुलाई में सारे आवेदन दे दिये थे, परंतु PayPal ने अपना विरोध दर्ज करने के लिये अंतिम दिन तक की प्रतीक्षा करी।

हमारा तो ये मानना है कि अमेरिकी कंपनी ने PayTM को जाने दिया होता, अगर उन्होंने प्रधान मंत्री मोदी के नोटों के विमुद्रिकरण करने के बाद इतनी लोकप्रीयता नहीं हासिल करी होती। इस कदम से ऐसे सभी मंचों की लोकप्रीयता भारतीय में बढ़ गयी है और वे समान्य से बीस गुणा अधिक ट्रैफ़िक के लिये ज़िम्मेदार हैं।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन