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MIT बनायेगी कस्टमाइज़ किए जा सकने वाले ड्रोन

ड्रोन इस समय बहुत प्रचलित हैं। उनका प्रयोग करने के नये व विविध तरीके ढूंढ़ने के साथ, (जिनमें फ़ोटोग्राफ़ी व डिलिवरी सबसे प्रचलित हैं) हर ज़रूरत के लिये उत्तम ड्रोन बनाने की होड़ भी चल रही है। खैर, MIT के शोधकों ने एक ऐसा नया सिस्टम तैयार किया है, जो कि आपको पेंट ही नहीं, ड्रोन की छोटी से छोटी डीटेल अपने अनुसार तय करने देता है, जिससे आपको अपनी ज़रूरत के अनुसार की मशीन मिले।

MIT की कंप्यूटर विज्ञान व कृत्रिम बुद्धी प्रयोगशालाओं का ये सिस्टम, ताक़त को खरीदने वालों के हाथ में रखता है। पारंपरिक चार पंखुड़ियों वाले, तस्वीर-लेने-के-लिये-उपयुक्त सोच से आगे बढ़ते हुए, MIT शोधकर्ताओं ने एक ऐसा सिस्टम बनाया है, जो कि आपको सब कुछ कस्टमाइज़ करने देता है। और सब कुछ से हमारा मतलब है, सब कुछ।

नये सिस्टम से आप ड्रोन का साइज़, आकार, और यहां तक कि बनावट भी अपने हिसाब से बना सकते हैं – बिल्कुल अपनी ज़रूरत के अनुसार। अगर आप सोच रहे हैं कि आपको इतनी परेशानी क्यों उठानी पड़े तो ये बतायइये अगर आपको ऊंचाइयों पर जाने वाला ड्रोन चाहिये, तो आप उसका वज़न कम कर देंगे ना? या फिर अगर आप डिलिवरी के लिये ड्रोन बनायेंगे, तो आप उसकी बैटरी लाइफ़ कम कर के उसकी वज़न उठाने की क्षमता को बढ़ायेंगे?

अगर आप ड्रोन खरीदने के लिये बाज़ार जाते हैं, तो आप सिर्फ़ उन्हीं चीज़ों में से चुनाव कर सकेंगे, जो उपलब्ध हो। MIT का प्रयास इस तरीके से होगा, कि हर चीज़ ज़रूरत के अनुसार डिज़ाइन हो।

कंप्यूटर विज्ञान व कृत्रिम बुद्धी प्रयोगशाला एक नया इंटरफ़ेस प्रयोग कर रहे हैं, जिससे उपभोक्ता अपनी ज़रूरत के अनुसार, ड्रोन के ज़रूरी हिस्से, जैसे कि रोटर व रॉड, विविध तरीकों से जोड़ सकते हैं। दुर्घटना न हो, इसलिये, सिस्टम ड्रोन की टेक ऑफ़, हॉवर और लैंड क्षमता को भी परखता है। तो, भले ही आपको ड्रोनों का ज़रा भी अनुभव न हो, जो कि अधिकतम लोगों को नहीं होता, तो भी आपको ऐसी चीज़ नहीं मिलेगी, जिसे उड़ने के लिये पंखों की ज़रूरत पड़े।

आपको मूल चीज़ों का ध्यान रखने की ज़रूरत भी नहीं। सिस्टम आपको वो सब छोड़ कर सिर्फ़ आपकी ज़रूरत की चीज़ों पर ध्यान देने देता है। तो जहां आपको घंटों बैठ कर ये जानने के लिये जोड़-घटाना नहीं करना होगा कि ड्रोन उड़ेगा या नहीं, आपके पास फिर भी इसकी तकनीक पर बहुत नियंत्रण होगा।

खैर, ऐसा इस क्षेत्र में पहली बार हो रहा है। पर अगर हम ये सोचें कि एक कंपनी लोगों को पेलोड के अनुसार अपने रॉकेट डिज़ाइन करने देती है, तो ड्रोन बहुत ही छोटे लगेंगे। ये देखने के बाद, हमको आश्चर्य नहीं होगा कि अगर कोई कंपनी उपभोक्ताओं को अपने ड्रोन डिज़ाइन करने का तरीका ही ना अपना ले। और हां, आप ड्रोन को विविध आकारों का भी बना सकते हैं, जैसे की खरगोश।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन