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भारतीय सरकार ने पहली बार किया ‘राष्ट्रीय सॉफ़्टवेयर पॉलिसी ड्राफ़्ट’ का विमोचन

भारतीय सरकार ने पहली बार राष्ट्रीय सॉफ़्टवेयर पॉलिसी ड्राफ़्ट का विमोचन किया है। उम्मीद है कि ये पॉलिसी भारतीय सॉफ़्टवेयर इंडस्ट्री को एकसार कर के उसे बढ़ावा देगी और आने वाले दशक में इसकी तेज़ बढ़ंत को संभव करेगी। सरकार को उम्मीद है कि ये पॉलिसी वैश्विक बाज़ार में भारतीय सॉफ़्टवेयर इंडस्ट्री की हिस्सेदारी को 10 गुणा बढ़ा कर उसे करीब $148 बिलियन तक ले जा सकती है।

हमें असल पॉलिसी के बारे में कुछ समय बाद जानकारी होगी, परंतु ये ड्राफ़्ट बहुत ही प्रगतिशील है। भारतीय सॉफ़्टवेयर प्रोडक्टों के सरकारी प्रोक्योरमेंट के लिये फ़्रेमवर्क स्थापित कराने के अलावा, ड्राफ़्ट में रक्षा, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, रेलवे, टेली-कम्युनिकेशन, पावर व स्वास्थ्य आदि स्थानीय प्रोडक्टों के प्रयोग पर भी ज़ोर दिया गया है।

इस समय वैश्विक सॉफ़्टवेयर प्रोडक्ट इंडस्ट्री करीब $411 बिलियन की है। ये अभी भी बढ़ रही है और हमें उम्मीद है कि 2025 तक ये इंडस्ट्री $1 ट्रिलियन की हो जायेगी। ये भारत की तुलना में है, जहां ये बाज़ार अभी भी मात्र $6.1 बिलियन का है, जिसमें से $2 बिलियन, एक्स्पोर्ट का हिस्सा है।

इस समय भारतीय सॉफ़्टवेय इंडस्ट्री, वैश्विक इंडस्ट्री का 1.48% हिस्सा बनाती है – जो कि भारत की IT काबिलियत को देखते हुए, शर्मनाक है। कुछ अनुमानों के अनुसार, भारतीय सॉफ़्टवेयर इंडस्ट्री इस समय $143 बिलियन की है और उम्मीद है कि ये 2015 तक $350 बिलियन की हो जायेगी।

ये ड्राफ्ट इसको बदल कर देश में रोज़गार बनाने और सॉफ़्टवेयर निर्माण को बढ़ावा देने का एक प्रयास है:

 ” इस पॉलिसी के ज़रिये हम 2017 तक 1,000,000 व 2025 तक 2,500,000 नौकरियों का निर्माण करना चाहते हैं “

इस पॉलिसी के ज़रिये, भारतीय इंडस्ट्री की वैश्विक बाज़ार में हिस्सेदारी को 2025 तक दस गुणा बढ़ा दिया जायोगा। ये सॉफ़्टवेयर प्रोडक्टों के स्थानीय व वैश्विक बाज़ारों में पहुंच को आसान कर के इसको संभव करने का प्रयास करेगा।

ड्राफ़्ट में ऐसे प्रावधान भी होंगे जिससे देश में ऐसा माहोल बने कि सॉफ़्टवेयर के रूप में कोर प्रोडक्ट वाली कंपनियां तेज़ी से विस्तार कर सकें।

सरकार करीब 10,000 तकनीक स्टार्टप भी स्थापित करना चाहती है। सरकार को उम्मीद है कि ये स्टार्टप विश्व स्तरीय प्रोडक्ट बना कर, वैश्विक मंच पर भारत की जगह स्थापित करने में सहायता करेंगे। साथ ही इसके ज़रिये प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तरीके से करीब 3.5 मिलियन लोगों को रोज़गार उपलब्ध होगा।

इससे, भारतीय इंडस्ट्री की सॉफ़्टवेयर अर्थव्यवस्था में बढ़ावा मिलेगा। सरकार, ‘मेड इन इंडिया’ सॉफ़्टवेयरों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देना चाहती है। अंतर्राष्ट्रीय सॉफ़्टवेयर बाज़ार फल रहा है और सरकार चाहती है कि इसके साथ भारतीय सॉफ़्टवेयर इंडस्ट्री भी पूरा लाभ उठा सके।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन