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‘मंगलयान’ के बाद, ‘इसरो’ कर रहा है “मंगल आर्बिटर मिशन -2″ की तैयारियाँ

आज जब हर कोई मंगल ग्रह पर शोध को लेकर उत्सुक है, तो ऐसे में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) खुद को इससे दूर कैसे रख सकता है | भारत सरकार की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, इसरो अब ‘मंगल आर्बिटर मिशन -2’ के लिए वैज्ञानिक प्रस्तावों की मांग कर रहा है, जिसके माध्यम से मंगल को और करीब से जाना जा सकेगा |

यह जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय में संबद्ध राज्य मंत्री, जितेंद्र सिंह द्वारा दी गई | श्री सिंह के हाथों ग्रहों के मामलों सहित सम्पूर्ण अंतरिक्ष विभाग की जिम्मेदारियाँ हैं | एक सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि मंगल आर्बिटर मिशन 2 के विन्यास, उद्देश्यों और वैज्ञानिक प्रयोगों का पूरा विवरण अभी तक तैयार नहीं है | लेकिन इस मिशन को लेकर मंथन शुरू हो गया है |

“अवसर की घोषणा” के प्रस्तावों को तैयार कर, भारत के अंदर ‘मंगल आर्बिटर मिशन -2’ के जरिये वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए प्रस्ताव प्राप्त करने की कोशिशें की जा रहीं हैं |

भारत का अंतिम मंगल ऑर्बिटर मिशन, “मंगलयान” था, जो की 2014 में शुरू किया गया था | 25 महीनों के बाद भी उपग्रह अभी काम कर रहा है और भारत के अंतरिक्ष रणनीति का एक बहुत ही प्रासंगिक हिस्सा बना हुआ है | भारत को शक्तिशाली अंतरिक्ष शक्तियों में से एक बनाते हुए, यह हमें बहुत ही अहम जानकारियाँ प्रदान करता है |

विषय पर बोलते हुए, इसरो उपग्रह केंद्र के ऑपरेशन उप-निदेशक, रितु करिधाल ने कहा,

” पृथ्वी पर दो वर्ष की अवधि, मंगल ग्रह पर एक वर्ष के बराबर होती है, मंगलयान, जिसने मंगल ग्रह की कक्षा में करीब दो साल पहले प्रवेश किया था, उसका पूरा एक चक्कर लगा चुका है, पिछले दो वर्षों की अवधि में उपग्रह द्वारा भेजे जा रहे डेटा का वायुमंडलीय विन्यास का विश्लेषण करने के लिए इसरो द्वारा अध्ययन किया जा रहा है “

ऐसा कहा जा रहा है कि मंगलयान बहुत ही सीमित वैज्ञानिक पेलोड के साथ भेजा गया था और इसलिए अन्य आवश्यकताओं की आपूर्ति के लिए ‘मंगल आर्बिटर मिशन -2’ की जरुरत महसूस की गई |

माना यह जा रहा है कि इस मिशन में यान लैंडर और रोवर से भी लैस होगा, जिसकी सहायता से मंगल ग्रह का निकटता से अध्ययन संभव हो सकेगा |

शुभकामनाओं के साथ ही हम इसरो को उनकी अब तक की सफलताओं के लिए हार्दिक बधाई और देश को वैश्विक स्तर पर एक नया मुकाम देने के लिए धन्यवाद देना चाहेंगे |

नई तकनीकों और विचारों के समायोजन को तलाशता मुसाफ़िर, जिसका मानना है कि उद्यमशीलता और प्रोद्योगिकी मिलकर ही विकास और विस्तार का अवसर प्रदान करतीं हैं |

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन