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भारत खरीदेगा सान बर्नार्डीनो के iPhone को खोलने वाली तकनीक

HAMILTON, NEW ZEALAND - MARCH 10: An India flag is seen during the 2015 ICC Cricket World Cup match between Ireland and India at Seddon Park on March 10, 2015 in Hamilton, New Zealand. (Photo by Anthony Au-Yeung-IDI/IDI via Getty Images)

पिछले वर्ष सान बर्नार्डीनो की गोली बारी के एक आरोपी का iPhone 5C खोलने में FBI की सहायता करने वाली इज़राइली कंपनी Cellebrite अब बहुत जल्द अपने प्रोडक्ट भारत भी एक्स्पोर्ट कर सकती है। ये याद रखने वाली बात है कि FBI ने तब Cellebrite का सहारा लिया जब Apple ने उपभोक्ता निजिता के बिनाह पर उनकी सहायता करने से मना कर दिया था।

भरत की फ़ॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (FSL), Cellebrite से उनकी ऐसी तकनीक खरीदने की चर्चा कर रही है, जिससे वे स्वयं iPhone व अन्य डिवाइस खोल सकें। The Economic Times के मुताबिक भारत ये तकनीक खरीद रहा है और डील एक महीने में पूरी हो जाने की आशंका है।

FSL के मुताबिक:

“भारत उन सभी देशों के लिये एक ग्लोबल हब बन जायेगा, जहां पर कानून फ़ोन खोल पाने में असक्षम है।”

इसका मतलब ये कि भारत इस तकनीक की सहायता से फ़ोन खोलने में दूसरे देशों की सहायता भी करेगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार ने पहले ही कुछ केसों में कंपनी से फ़ोन खोलने में सहायता ली है। परंतु इसको खरीद के, वे अपनी सुविधा अनुसार ये कार्य कर सकते हैं।

अब देखना ये होगा कि क्या भारत के पास इस तकनीक के ऊपर एकाधिकार होगा या नहीं। साथ ही, जिन परिस्थितियों में इस तकनीक का प्रयोग दूसरे देशों की सहायता करने में हो, वो भी अस्पष्ट है। और तो और, डिवाइसों को अनलॉक करने के लिये इस तकनीक का प्रयोग करने पर बहुत से नैतिक व कानूनी प्रश्न उठ सकते हैं।

सान बर्नार्डीनो केस में, FBI ने Cellebrite को उनकी सेवाओं के लिये करीब $1 मिलियन का भुगतान किया था। परंतु अभी भी ये स्पष्ट नहीं है कि ये तकनीक भारत कितने में खरीदेगी।

डील कागज़ी रूप से अभी भी पूरी होनी बाकी है, परंतु FSL अधिकारियों को ये ज़रूर विश्वास है कि सरकार ये तकनीक जल्द ही ले लेगी।

ऐसी तकनीक खरीदने के साथ, खरीदने वाले के कंधों पर एक बड़ी ज़िम्मेदारी भी आ जाती है। एक बार ये तकनीक भारत सरकार के हाथ लग जाये, तब भारतीय उच्चतम न्यायालय को दखल देकर ऐसे नियम बनाने चाहिये, जिससे इस तकनीक का प्रयोग नियंत्रित रह सके और किसी भी व्यक्ती की निजिता का बेवजह उल्लंघन न हो।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन