इलेक्ट्रानिक्स खबर

चीन के बाज़ारों में इलेक्ट्रिक कारों को उतारने के लिए, रेनॉल्ट-निसान भारत में करेंगे इसकी निर्माण संबंधी पहल

विश्व भर में बढ़ते प्रदूषण और यातायात संबंधी समस्याओं के चलते, अब ऑटोमोबाइल निर्माता हरियाली और स्वच्छ विकल्प के निर्माण की दिशा में ध्यान केंद्रित कर रहें हैं | रेनॉल्ट निसान, ऐसे ही एक निर्माता हैं जो इलेक्ट्रिक कारों को मोटर वाहन अर्थव्यवस्था के भविष्य के रूप में देखतें हैं और यही कारण है कि अब ये भारत में भी अपने अनुसंधान और विकास प्रयासों के विस्तार का मन बना रहें हैं |

पेरिस मोटर शो में, रेनॉल्ट के वैश्विक सीईओ, कार्लोस घोसन ने ईटी के साथ बातचीत में कहा कि कंपनी का मानना था कि संयुक्त राज्य अमेरिका इलेक्ट्रिक कारों के विकास का नेतृत्व करेगा, लेकिन चीन में तेज़ी से बढ़ती इनकी मांगों की वजह से वहाँ पर निर्माता और चीनी सरकार भी इसका बड़े पैमाने पर समर्थन करते नज़र आ रहें हैं |

चीनी बाजार इस तकनीक से फलफूल रहा है, और हम स्थानीय निर्माताओं द्वारा सस्ते में इलेक्ट्रिक कारों को मुहैया करवाने की वजह से बाज़ार में अपना नेतृत्व खो रहें हैं, इसलिए हम चीनी बाजार में अपनी सस्ती इलेक्ट्रिक कारों को उतारने का प्रयास कर रहें हैं ताकि आने वाले समय में हम किसी से पीछे न छूट जायें

-घोसन ने अपने एक वक्तव्य में कहा

रेनॉल्ट-निसान गठबंधन पहले से ही अपने इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी विकास कार्यक्रमों में € 4 अरब डॉलर (लगभग $ 5.2 अरब) का निवेश करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन अब प्रतिद्वंद्वी निर्माताओं के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए यह अपने प्रयासों का और अधिक विस्तार कर रहें हैं |

रेनॉल्ट अभी भी भारत को अपने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बाजार के रूप में नहीं देखता है, लेकिन अब सस्ती इलेक्ट्रिक कारों के निर्माण को लेकर, चेन्नई में अनुसंधान और विकास केंद्र स्थापित करने की परियोजना को पूरा करने का मन बना रहा है | यह इस परियोजना के तेज विस्तार के लिए विकास केंद्र के कर्मियों और संसाधनों का पूर्ण उपयोग करेगा |

घोसन ने बयान में यह भी कहा,

इलेक्ट्रिक कारें जल्द ही हमारे उद्योग के भविष्य का हिस्सा बनने जा रहीं हैं, हम कम लागत वाली इलेक्ट्रिक कारों को भारत में विकसित करने की योजना बना रहें हैं ताकि इनको चीन के बाज़ार में उतारा जा सके,

इसके साथ ही सरकार का समर्थन भी बहुत महत्वपूर्ण है और चीनी सरकार कारों के विद्युतीकरण को लेकर काफ़ी उत्सुक है, हालांकि भारत में इलेक्ट्रिक कारों का भविष्य अभी भी दूर है

आने वाले दौर में सिर्फ़ इलेक्ट्रिक कारों की बात करना शायद बेईमानी हो क्यूंकि अब स्वचालित वाहनों का दौर भी ज्यादा दूर नहीं नज़र आता | इस विषय पर घोसन का भी मानना है कि अधिकतर ऑटोमोबाइल निर्माता इस दिशा में क़दम बढ़ा चुकें हैं, परन्तु 3-4 साल बाद ही हमें पर्याप्त प्रगति देखने को मिल सकती है | कुछ तकनीकी / ऑटोमोबाइल कंपनियों द्वारा इस दिशा में पिछले कुछ वर्षों से ही प्रयास चल रहा है और ये अपने सड़क परीक्षण तक की शुरुआत कर चुकीं हैं |

लेकिन उन्होंने फिर से भारत या ब्राजील जैसे उभरते बाजारों में इस प्रौद्योगिकी तकनीक के आने का अंदेशा जताया और इस पर टिप्पणी करते हुए कहा,

ड्राइवरों द्वारा नियमों का सम्मान बहुत आवश्यक है, स्वायत्त कार तो लाल बत्ती पर रुक जाएगी पर क्या मुंबई या रियो डी जनेरिओ के उपयोगकर्ता  इसका पालन करेंगे ? बाज़ारों में उतारने से पहले, इसका उपयोग सबसे पहले अमेरिका, जापान और यूरोप जैसे अनुशासित ड्राइविंग देशों में करके देखा जाएगा  

उभरते बाजारों के लिए, रेनॉल्ट वर्तमान में अपनी फैशनेबल और सामान्य बजट वाली गाड़ी ‘kwid’ पर ध्यान दे रहा है, जो देश में अपार लोकप्रियता हासिल कर रही है | एक ख़राब यातायात व्यवस्था और उचित कानूनों के अभाव के कारण, कंपनी भारत में इलेक्ट्रिक कार और सेल्फ़-ड्राइविंग परियोजनाओं के विस्तार के लिए उत्सुक नहीं है |

नई तकनीकों और विचारों के समायोजन को तलाशता मुसाफ़िर, जिसका मानना है कि उद्यमशीलता और प्रोद्योगिकी मिलकर ही विकास और विस्तार का अवसर प्रदान करतीं हैं |

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन