खबर स्टार्टअप्स

ग्राहकों और ड्राइवरों के अनुभवों में सुधार के लिए अब Ola इस्तेमाल करेगा नए जमाने के तकनीकी समाधान

आज जब स्वदेशी स्टार्टअप ओला पहले से ही भारत में अमेरिकी टैक्सी एग्रीगेटर उबेर से आगे निकल चुका है, ऐसे में इसने बिना रुके, जल्द ही एक नई तकनीक के इस्तेमाल से ग्राहकों और ड्राइवरों के अनुभवों में सुधार और अधिक आकर्षक सेवा प्रदान करने का दावा किया है | इसी के चलते इसने आज नई तकनीक के समाधान की एक श्रृंखला का अनावरण किया है |

चीन से बाहर निकलने के बाद, उबेर अब भारत में अपने संचालन सुधार के लियें और अधिक धन एवं प्रयासों का इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन ओला किसी भी हाल में उसे बाज़ार में अपने से आगे निकलने नहीं देना चाहता | अब यह नक्शे, भू-स्थान टैगिंग और ग्राहक डेटा का विशाल मात्रा में उपयोग कर, नेविगेशन और पिक / ड्रॉप जैसे क्षेत्रों में सुधार की कोशिश करता नज़र आ रहा है |

लेकिन ओला अब आकर्षण के केंद्र के रूप में, नए नवाचारों को पेश करने के लिए एक कदम और आगे जा रहा है, अब इनके माध्यम से टैक्सी बुकिंग करने वाले उपयोगकर्ता के स्थान का लगभग सही अंदाज़ा लगाने की बजाये अब ड्राईवर को उनके सटीक स्थान का पता लग सकेगा और ऐसी ही सुविधा ग्राहकों के लिए भी देने की योजना है |

कंपनी अब पार्कों, आवास कालोनियों, मॉल, आदि को टैक्सी बुकिंग के एक बड़े स्रोत के रूप में देख रही है | अब इन स्थानों को टैक्सी बुकिंग के एक बड़े स्रोत के रूप में चिन्हित किया जाएगा ताकि बुकिंग करते वक़्त ग्राहक, लैंडमार्क के रूप में इनको टैग कर सकें |

ओला के सह-संस्थापक और सीटीओ अंकित भाटी ने TOI से कहा

भारतीय सडकें और स्थान, अन्य भौगोलिक क्षेत्रों की तुलना में अलग हैं और इन्हें एक अलग तरीके के संचालन की जरूरत है, और अब यह चिन्हित स्थान यात्रियों और चालकों के लिए इंतज़ार का समय कम करने की दिशा में मददगार साबित होंगे

लेकिन, क्या वास्तव में नेविगेशन, पिक / ड्रॉप में ग्राहकों और ड्राइवरों के लिए सुधार होगा ? इस बात पर अत्यधिक शक है क्योंकि लगता है कि इस मॉडल में एक बुनियादी दोष है, लेकिन हम अभी भी नहीं जानते कि कैसे वास्तव में ओला एक ‘लोकप्रिय’ स्थान को टैग और फिर उस पर नेविगेट करने के लिए ड्राइवरों को सहूलियत मुहैया करवाएगा |

चलिए एक उदाहरण लेते हैं, मान लीजिये ओला ने किसी मॉल को टैग किया जहाँ एक से अधिक निकास के द्वार हैं ,और वहाँ से किसी ने एक बुकिंग की, तो ड्राईवर को यह कैसे पता चलेगा कि ग्राहक मॉल के किस गेट से निकलने वाला है ? इसके लिए उसको कॉल का सहारा लेना ही पड़ेगा |

हमनें इन सुविधाओं के सम्पूर्ण स्पष्टीकरण के लिए ओला को मेल भेजा है और उचित जवाब मिलते ही हम आपको बतायेंगे |

अब कुछ और विशेषताओं की बात करें तो, ओला अब ग्राहकों के पुराने पिकअप बिंदु को भी स्टोर रखेगा ताकि उनके पास स्थानों का एक व्यापक डाटा उपलब्ध हो सके |

ओला ने एक बयान में कहा,

संचालन के इतने वर्षों में हमने बुकिंग और बोर्डिंग पैटर्न को लेकर बहुत सा डाटा एकत्रित किया है, और अब इस सुविधा की मदद से हम रोजमर्रा के उपयोगकर्ताओं को उन्नत बोर्डिंग अनुभव प्रदान कर पायेंगे 

इसी के साथ ओला ‘दिशा-निर्देश शेयर’ नामक नई सुविधा भी लाया है, जिसमें आप अपने स्थान के साथ-साथ निकटतम लैंडमार्क को भी टैग कर सकतें हैं, ताकि ड्राइवरों को नेविगेट करने में मदद मिल सके | यह भारतीय इलाकों की गलियों के चलते होने वाली देरी से थोड़ी राहत दिला पायेगा |

ओला अब $63 बिलियन की अमेरिकी दिग्गज उबेर से आगे निकलने की होड में है, जो की भारतीय सड़कों में अपना राज चलाना चाहती है |

उसी के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए कंपनी ने हाल ही में नई श्रेणियों की शुरूआत( जैसे TaxiForSure ), कीमतों में कटौती और कर्मचारियों को बर्खास्त करने जैसे कई कदमों को उठाया है | इतना ही नहीं, उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में इसने महिंद्रा के साथ भागीदारी भी की है | यह सहयोग मुख्य रूप से ड्राइवर भागीदारों को सशक्त बनाने की दिशा में लिया गया है, जिससे वह सस्ती कीमत पर निवेश और ख़रीद के मौके तलाश सकें |

नई तकनीकों और विचारों के समायोजन को तलाशता मुसाफ़िर, जिसका मानना है कि उद्यमशीलता और प्रोद्योगिकी मिलकर ही विकास और विस्तार का अवसर प्रदान करतीं हैं |

Add Comment

Click here to post a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन