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2 अलग कक्षाओं में 8 उपग्रहों का प्रक्षेपण कर, इसरो ने बनाया एक और कीर्तिमान

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने कद को बढ़ाते हुए एक और कीर्तिमान रच डाला है | इसने आज दो अलग-अलग कक्षाओं में कुल आठ उपग्रहों के सफलतापूर्वक लांच के साथ ही, अब तक ऐसा कर सकने में सक्षम अंतरिक्ष एजेंसियों के विशिष्ट समूह में जगह बन ली है |

इसरो ने हाल ही में शिक्षा एवं अनुसंधान संगठनों और अन्य देशों के लिए उपग्रहों के प्रक्षेपण सम्बंधित काफ़ी अथक प्रयास कियें हैं | व्यापक रूप से अपने कुछ सबसे लंबे और जटिल मिशनों में से एक, इस मिशन में इसरो ने एक ही रॉकेट की मदद से आठ उपग्रहों को दो अलग-अलग कक्षाओं में भेजने का करतब कर दिखाया |

इस मिशन के लिए ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) -C35 को चुना गया था | यह रॉकेट आज सुबह 9:12 पर इसके पेलोड के साथ, दक्षिण भारत में श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया गया था | लांच के दौरान यह आठ उपग्रहों से लैस था | 371 किलो के वजन के साथ ‘SCATSAT-1’, इन आठ उपग्रहों में से सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है जिसको मौसम की स्थिति के अध्ययन के लिए तैनात किया जाएगा |

इसके साथ ही इसमें PISAT और प्रथम जैसे उपग्रह भी शामिल हैं जो क्रमश: बेंगलुरु के पीइएस विश्वविद्यालय और आईआईटी बॉम्बे द्वारा निर्मित हैं | इसमें से एक सुदूर संवेदन अनुप्रयोगों की खोज और दूसरा अंतरिक्ष में कुल इलेक्ट्रॉन की गिनती का अनुमान लगाने से जुड़े प्रयसों को लेकर काम करेंगे |

इसी के साथ ही अल्जीरिया से तीन उपग्रहों, ‘Alsat -1 बी’, ’Alsat -2 बी’ और ‘Alsat-1N’ भी इसमें शामिल रहे | जिसमें से 1 बी और 2 बी क्रमश: पृथ्वी अवलोकन और रिमोट सेंसिंग के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, जबकि 1N एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शक है |

इसी के साथ इस प्रक्षेपण में अमेरिका का ‘Pathfinder-1’, जो एक वाणिज्यिक उच्च संकल्प इमेजिंग उपग्रह है और कनाडा का ‘एनएलएस -19’ उपग्रह भी शामिल किया गया है |

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केवल एक ही रॉकेट के इस्तेमाल के साथ, उपग्रहों को दो अलग-अलग कक्षाओं में भेजना ही इस मिशन को असाधारण बनाता है | इस मिशन के साथ ही इसरो के 100 प्रतिशत सफलता दर हासिल करने के बाद, यह ऐसा कर पाने में सक्षम अंतरिक्ष एजेंसियों के विशिष्ट समूह का एक महत्वपूर्ण अंग बन गया है |

इसरो के मुताबिक,

SCATSAT-1, 720 किलोमीटर के ध्रुवीय एसएसओ में भेजा गया है जबकि विश्वविद्यालयों / शैक्षणिक संस्थान उपग्रहों और पांच विदेशी उपग्रहों को एक 670 किलोमीटर की ध्रुवीय कक्षा में भेजा गया है और यह पीएसएलवी का पहला मिशन है जिसमें पेलोड दो अलग-अलग कक्षाओं में स्थापित करने का लक्ष्य था  

इस बीच, इसरो ने निश्चित रूप से एक शानदार काम किया है | इसने न सिर्फ महज 25 दिनों में इस मिशन को पूरा किया बल्कि पीएसएलवी-C35 को दुबारा एक दूसरी कक्षा में प्रक्षेपित करने का भी काम किया | इसरो का पीएसएलवी को एक ही बार में दो कक्षाओं तक पहुँचाना ही इस मिशन को ख़ास बनाता है |

प्रक्षेपण के बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने ट्विट के जरिये संगठन को बधाई दी,

 हमारे अंतरिक्ष वैज्ञानिकों द्वारा, इतिहास लिखने की दिशा में एक और क़दम

एक ही लांच के माध्यम से बहु कक्षा में प्लेसमेंट की क्षमता, इसरो को आज एक अलग मुकाम पर खड़ा करती है | इसरो आज प्रक्षेपण से जुड़ी कई अंतरराष्ट्रीय माँगों से घिरा हुआ है और इसने अब तक 70 अंतरराष्ट्रीय माँगों को पूरा भी किया है | पर किफायती तरीके से मल्टी ऑर्बिट प्लेसमेंट इसरो की कार्यकुशलता को साफ़ दर्शाता है |

नई तकनीकों और विचारों के समायोजन को तलाशता मुसाफ़िर, जिसका मानना है कि उद्यमशीलता और प्रोद्योगिकी मिलकर ही विकास और विस्तार का अवसर प्रदान करतीं हैं |

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन