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पेटीएम द्वारा संचालित योजना से अब भारत में राजमार्ग टोल को कैशलेस बनाने की तैयारी

डिजिटल भुगतान की दौड़ में अग्रसर, पेटीएम ने अब अपनी डिजिटल सेवाओं में एक और सुविधा को शामिल किया है | कंपनी ने एनएचएआई के साथ भागीदारी करके अब अपने एप्लीकेशन मंच में टोल का भुगतान करने की सुविधा का विकल्प दिया है | इसी के साथ, अब आप भारत के राजमार्गों में भी विदेशों जैसी सुविधा पा सकेंगे |

देश भर में फैले सड़कों के बेहद विशाल नेटवर्क के साथ, भारत में टोल बूथों की एक बड़ी संख्या है | इन बूथों को पार करते समय उपयोगकर्ताओं को करों के रूप में सैकड़ों रूपये का भुगतान करना आवश्यक होता है | पेटीएम अब एनएचएआई कि इस लेनदेन की प्रक्रिया को कैशलेस बना कर कई बाधाओं को दूर करने का प्रयास कर रहा है |

इस विषय पर बोलते हुए पेटीएम के सीनियर उपाध्यक्ष, किरण वासिरेड्डी ने कहा,

कई महत्वपूर्ण टोल प्लाजाओं पर कैश लेन-देन की प्रक्रिया, यातायात को धीमा बनाने जैसी कई परेशानियाँ खड़ी कर देती है, पेटीएम की FASTag प्रक्रिया से यात्रियों और टोल प्लाजा परिचारकों दोनों को काफी  राहत मिलेगी और ईंधन की बचत के साथ ही यह क़दम राष्ट्रीय हित की दिशा में काफी महत्वपूर्ण है

इस भागीदारी के साथ ही कंपनी अब कैशलेस प्रक्रिया को देश भर में आम बनाने के उद्देश्य के और भी करीब आ गई है | राजमार्ग टोल में ऐसी सेवाओं के आने से अब भारत कैशलेस अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में वास्तविक अर्थ में एक बड़ा क़दम उठाने जा रहा है |

इसके साथ ही अब इस एप्लीकेशन मंच ने राजमार्ग टोल, पेट्रोल पंप, किराने की दुकानों, रेस्तरां और कॉफी की दुकानों, मल्टीप्लेक्स, स्थानीय चाय या सब्जी विक्रेताओं और अखबार विक्रेताओं को शामिल किया है, जो कैशलेस भुगतान प्रक्रिया को स्वीकार करेंगे |

हाल ही में एप्लीकेशन मंच से टिकट बुक करने की सेवा को लेकर हुए हुई, भारतीय रेलवे और पेटीएम की भागीदारी को भी इस दिशा में काफी बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है |

नई तकनीकों और विचारों के समायोजन को तलाशता मुसाफ़िर, जिसका मानना है कि उद्यमशीलता और प्रोद्योगिकी मिलकर ही विकास और विस्तार का अवसर प्रदान करतीं हैं |

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन