खबर

Jio के आक्रमक आगाज़ के बाद, Vodafone ने अपने भारतीय अंग का उधार कम करने के लिये $3 बिलियन लगाने के विचार में

जब से मुकेश अंबानी ने अपने बहुप्रतीक्षित – $22 बिलियन के – Jio नेट्वर्क का पायलट शुरू किया था, तभी से इस बात के कयास लगने लगे थे कि ये भारतीय टेलेकॉम सेक्टर को कैसे बदलेगा, जिसे बदलाव की बहुत ही आवश्यक्ता है।

Jio के लांच होने के चंद दिनों के अंदर ही हमें अच्छी व बुरी, दोनों ही चीज़ें सुनने में आ रही हैं। अच्छी चीज़ों में सर्वश्रेष्ठ हैं वादे के अनुसार बहतर नेट्वर्क और प्रतिद्वंदियों के मध्य उपभोक्ता बनाये रखने के लिये हलचल और इसी लिये दामों का कम व सेवा का बहतर होना। इन सब से उपभोक्ताओं को उच्चतम सेवा प्राप्त हो रही है।

बुरे में सबसे बड़ा है Jio सिमों की उपलब्धता में आयी कमी, जहां उपभोक्ता सुबह से शाम तक दुकानों में कतारें लगाये रहते हैं, जिससे उन्हें एक सिम मिल जाये। एक और बुरी चीज़ जो सुनने में आयी है, वो है इनके बिजली से तेज़ नेट्वर्क की गति में आया धीमापन। जहां पहली परेशानी को दूर कर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर दूसरा बैंडविथ के साथ आ रही दिक्कतों के कारण हो सकता है। साथ ही, Jio आपसी कनेक्शन के मामले में तो अपने प्रतिद्वंदियों से बाज़ी मारने ही वाला है, जल्द ही तेज़ी की दिक्कत को भी दूर कर दिया जायेगा।

अब जहां बुराइयों ने Jio के ब्रांड पर अधिक प्रभाव नहीं डाला है, उनकी बहतरी ने प्रतिद्वंदियों को हिला कर रख दिया है, जो कि अब उपभोक्ता बचाये रखने और बहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के लिये अपने व्यापार में और भी निवेश करने के लिये तैयार हो रहे हैं। इन कंपनियों में सबसे नयी है Vodafone India।

Economic Times में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, अपने नये IPO के बारे में सोचते हुए भी Vodafone UK के अभिभावक अपने भारतीय अंग में $3 बिलियन तक का निवेश करने के लिये तैयार हो रहे हैं। ये कदम Vodafone India के बढ़ते उधार को चुकाने (जो कि 2015-16 में ₹81,500 करोड़ पहुंच रहा था) और आने वाली स्पेक्ट्रम की नीलामी के लिये कंपनी को तैयार करने हेतु है। अब Jio के प्रतिद्वंद में आने से, संभावना है कि बोलियां बहुत ऊंची जायेंगी (जो कि पिछले वर्ष भी थीं), जिससे सरकार की बहुत कमाई होगी।

मुद्दे से अवगत एक व्यक्ति ने बताया:

“विदेशी बाज़ारों में चल रहे व्यापार के कारण यहां पर उधार को एक्विटी से बदलना संभव है, क्योंकि यहां एक्विटी का मूल्य अधिक है और ये यहां पर उधार सेवा दामों को कम करने में सहायता करेगा।”

परंतु अभी तक इस बात पर Vodafone ने कोई बयान नहीं दिया है। Jio के आगमन से पहले, ऑपरेटर किसी भी डेटा पैक के लिये मनचाहा दाम ले रहे थे, जिसके कारण भारत सबसे महंगे बाज़ारों में से एक बन गया था। अब Jio द्वारा ₹50 में 1GB 4G इंटरनेट उपलब्ध कराने के बाद, Vodafone व अन्य उपभोक्ताओं के लिये इसे और सस्ता बनाने के लिये दाम कम करने पर मजबूर हो गये हैं।

इसी के कारण, कंपनी द्वारा हिम्मत दिखाने के बाद भी, कंपनी को प्रस्तावित IPO लाने मे समय लग सकता है। इन सभी मुद्दों से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया:

“कंपनी विचार कर रही है कि क्या उन्हें अपना IPO और आगे बढ़ा देना चाहिये, क्योंकि बाज़ार इस समय सहीं नही प्रतीत हो रहा है।”

अख़बार द्वारा प्रश्न के रूप में भेजे गये ई-मेल का Vodafone ने कुछ इस प्रकार उत्तर दिया:

“हम अपने प्रस्तावित IPO के लिये अभी भी तैयारी कर रहे हैं और हमारे टाइम टेबल में किसी भी प्रकार का कोई बदलाव नहीं आया है।”

Vodafone India अपना नया IPO लाने में क्यों घबरा रही है, यह आपको इस बात से समझ आ सकता है कि Reliance Jio के लांच के दिन, Airtel व Idea ने एक दिन में, एक साथ करीब $2 बिलियन का नुक़सान उठाया था, क्योंकि निवेशकों ने Jio को भारी बैकिंग दी थी।

Add Comment

Click here to post a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन