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कृत्रिम बुद्धी में उपभोक्ता केंद्रित अपना कार्य बढ़ाने के लिये Mad Street Den को मिला ए सत्र में गुप्त रक़म का निवेश

कृत्रिम बुद्धी, हमसे कुछ बहतर, और तेज़ बनाने का हमारा प्रयास है। भले ही ये कार्य बहुत दूर हो, परंतु इस क्षेत्र में हम कुछ आगे तो बढ़े हैं। और स्टार्टप ईकोसिस्टम के बहुत कम स्टार्टप, इस क्षेत्र में पूरी तरह रम पाये हैं।

हमारे रोज़मर्रा के जीवन में कृत्रिम बुद्धी लाने वाला Mad Street Den अब इसे एक स्तर ऊपर ले जाने के विचार में है। पती पत्नी द्वारा संस्थापित इस स्टार्टप को ए सत्र में निवेश मिलने की बात सामने आयी है और कयास लगाये जा रहे हैं कि ये निवेश $5 मिलियन के करीब है। इससे पहले, उन्हें डेढ़ वर्ष पहले सीड सत्र मे $1.5 मिलियन का निवेश मिला था, जो कि किसी भी स्टार्टप को मिले सीड सत्र में सबसे अधिक है – कम से कम भारतीय स्टार्टपों में।

US में पंजीकृत परंतु मुख्यतः भारत से कार्य कर रहे इस स्टार्टप को करीब ढाई वर्ष पहले, एक न्यूरोवैज्ञानिक आनंद चंद्रशेखरन, जिन्होंने Stanford से अपनी डिग्री प्राप्त करी है और उनकी पत्नी अश्विनी अशोकन ने संस्थापित किया। अश्विनी Intel की बहुत पुरानी कर्मचारी थीं और उन्होंने वहां के चिप निर्माण अंग Intel Labs के शोध में कार्य किया है।

कंपनी को इससे पहले सीड सत्र में $1.5 मिलियन की निवेश मिला है – जो कि भारतीय स्टार्टप ईकोसिस्टम में सबसे अधिक सीड निवेश है और उन्होंने ई-कॉमर्स साइटों के लिये कृतिरिम बुद्धी से चलने वाला विज़ुअल खोज मंच बनाया है। मंच – Vue.AI अब Mad Street Den के उपब्रांड की तरह कार्य कर रहा है और इस समय कंपनी का मुख्य केंद्र है।

Vue.AI के साथ, कंपनी ई-कॉमर्स कंपनियों को अनेक कृत्रिम बुद्धी की सुविधायें उपलब्ध कराती है, जिनमें विज़ुअल खोज, उपभोक्ताओं को स्वचलित ईमेलर और ईकॉमर्स कंपनियों द्वारा ब्रांड को बिना किसी व्यक्ति के हस्ताक्षेप के प्रोडक्ट टैग करने आदि की सुविधा उपलब्ध है। Vue.AI की सहायता से ब्रांड अपने मुख्य उपभोक्ताओं के लिये मंच पर अपने कस्टमाइज़ होम पेज भी बना सकती है।

सिर्फ़ इतना ही नहीं। हमारे लेखक से देर रात हुई बात में कंपनी के सी.टी.ओ. और सह संस्थापक आनंद ने बताया कि कैसे Vue.AI सिर्फ़ सतह को ही खरोंच रही है और Mad Street Den कैसे एक कंपनी के रूप में और भी विस्तृत होगी। ये इस खोज इंजन को और भी बढ़ाने के और इस क्षेत्र में और भी शोध करने के विचार में हैं।

“कृत्रिम बुद्धि कि ओर अनेक रास्ते जाते हैं, परंतु उपभोक्ता कि ओर से भी एक रास्ता हो सकता है। परंतु ये एकमात्र तरीका नहीं। इसी लिये, हम अनेक रास्तों से इसमें प्रवेश कर के गहरा शोध करेंगे, क्योंकि हमने Mad Street Den को इसी उद्देश्य के साथ स्थापित किया था।”

उन्होंने आगे बताया कि कंपनी अपने अभी के मॉड्यूलों के साथ एक्सपेरिमेंट करती रहती है और ये देखने का प्रयास करती है कि ये रीटेल के अलावा और कहां प्रयोग हो सकते हैं। आपकी जानकारी के लिये बता दें, Mad Street Den इस समय मोबाइल गेमिंग, इंगेजमेंट ऐनालिसिस, इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स, और कृत्रिम बुद्धी जैसे कि गेज़ ट्रैकिंग, जेस्चर डिटेक्शन आदि प्रयोग करने वाले फ़ोटो ऐप और सोशल मीडिया के लिये भी प्रोडक्ट उपलब्ध कराते हैं।

“कृत्रिम बुद्धी Mad Street Den की शुरवात मात्र है। हमारे स्वीट में करीब 15 प्रोडक्ट हैं और हम हमेशा और बनाने का प्रयास करते रहते हैं। और इस प्रक्रिया में हमारे मॉड्यूल बहतर हो रहे हैं और हम हमेशा इस प्रयास में रहते हैं कि हम अपने टूलों को दूसरे क्षेत्रों में भी उपलब्ध करा सकें।”

चंद्रशेखरन ने जोड़ा।

ये देखन योग्य है कि निवेशक सीधे उपभोक्ता प्रोडक्ट बनाने की जगह शोध करने वाली कंपनी में निवेश कर रहे हैं। ये, आनंद ने कहा, उनके लिये लाभकारी रहा है कि उन्हें एक शोध केंद्रित स्टार्टप पर पैसे लगाने वाले निवेशक मिले हैं, वो भी भारत जैसे उपभोक्ता केंद्रित ईकोसिस्टम में।

वे कहते हैं:

“निवेशक हमें सपोर्ट करते हैं। हम कुछ समय से Sequoia से बात कर रहे हैं, और ये देख कर हमें बहुत अच्छा लगता है कि जो हममें निवेश कर रहे हैं, उन्हें हमारे बनाये गये प्रोडक्टों के बारे में भी जानकारी है।”

अंत में, बात आयी कि क्या Mad Street Den उपभोक्ताओं से सीधे बात करने वाला कोई प्रोडक्ट भी ला रहे हैं। Google ने भी बताया है कि उन्होंने कुछ ऐसा विकसित किया है, जो कि एक गेमिंग चैंपियन को भी हरा दे। तो क्या ऐसा कुछ Mad Street Den से भी देखने को मिलेगा? आनंद ने कुछ विशेष बताया:

“हम कुछ B2C के लिये नहीं सोच रहे, क्योंकि हम अभी सिर्फ़ B2B कि ओर केंद्रित हैं। हमारी कंपनी सिर्फ़ कृत्रिम बुद्धी में शोध/एक्सपेरिमेंट में बहुत केंद्रित हैं और प्रयोग में आने वाले बैकबोन प्रोडक्ट बनाने के विचार में हैं। अगर हम B2C में घुस जाते हैं, तो हमें मार्केटिंग, PR, और दिल और दिमाग सब कुछ एक ही प्रोडक्ट में लगाना होगा, जिसका मतलब है हमारा हमारे लक्ष्य से भटकना।”

इसका मतलब ये नहीं कि M.A.D. कोई प्रोडक्ट बना ही नहीं रही। वे उपभोक्ता के लिये विशेष प्रोडक्ट बनायेंगे, पर कुछ समय बाद।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन