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Ola दिल्ली में शहर की टैक्सी सेवा चलाने के लिये ‘Ola Fleet’ नाम का प्रयोग करेगी

भारतीय सरकार देश में कैब ऐग्रिगेटरों का कार्य करना मुश्किल बना रही है। इससे पहले, सरकार ने ऐप-आधारित टैक्सी सेवा को ग़ैरकानूनी बताया था। तो Ola ने पुनः लाइसेंसिंग प्रोसीजर को नयी दिल्ली में शुरू कर दिया है (कर्नाटक के बाद, अगर आपको पता न हो)।

Economic Times के मुताबिक, कंपनी ने नये लाइसेंस के लिये 1 जून को आवेदन डाल दिया था। रिपोर्ट में ये भी लिखा था कि इस लाइसेंस का आवेदन एक नये नाम से डाला गया है – Ola Fleet। आम तौर पर इस लाइसेंस को जारी करने के लिये 30-40 दिन का समय लगता है।

अगस्त 2015 में, दिल्ली सरकार ने शहर टैक्सी स्कीम लायी, जिसके अंतर्गत ऐप-आधारित टैक्सी ऐग्रिगेटर भी कानून के दायरे में आ जायेंगे और राष्ट्रीय राजधानी में अपना पंजीकरण करा कर कार्य कर सकेंगे।

परंतु एक टैक्सी ऐग्रिगेटर 2,500 से अधिक टैक्सियों को पंजीकृत नहीं कर सकता है और उन्हें GPS डिवाइसों, टैक्सी मीटरों और किराया नियंत्रण का प्रयोग करना होगा। जो कंपनियां 2,500 कैबों के साथ कार्य कर रही हैं, वे एक सब्सिडरी के साथ पंजीकरण कर सकती हैं।

स्कीम में ये भी लिखा था कि हर टैक्सी में मोटर कैब का परिवहन डिपार्टमेंट का पंजीकरण प्रमाणपत्र होना, उसमें CNG जैसा साफ़ इंधन होना, इंजन की गुणवत्ता 600cc से अधिक होना और बैठने की क्षमता चालक समेत सात से ऊपर न होना अनिवार्य है।

जहां Ola सभी नियमों का पालन कर रही है, वहीं, Uber, ने इन सभी नियमों का विरोध करते हुए उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर करी है और लाइसेंस के लिये भी आवेदन नहीं दिया है।

ये आपको ज्ञात होगा कि Uber सरकार द्वारा लगाये गये नियमों के खिलाफ़ लड़ रही है, कर्नाटक में लगाये गये नियमों से भी। परंतु ET की रिपोर्ट में लिखा था कि Uber के साथ, Ola ने भी इन नियमों के प्रति अपने परामर्श देने के लिये सरकार से बात करने का प्रयास किया है।

पिछले कुछ महीनों से, दोनों कंपनियों को सरकार के अनेक नियमों व कानूनों के कारण परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। परंतु जहां Ola को “ऑन-डिमांड टैक्सी ऐग्रिगेटर” का लाइसेंस मिल गया है, Uber के आवेदन को अधूरे कागज़ों के कारण नामंज़ूर कर दिया गया था।

देश में इन कैब सेवाओं पर प्रश्न दिसंबर 2014 में हुए बलात्कार के वाक्यो के बाद से उठने शुरू हुए हैं, जहां एक Uber चालक ने कथित तौर पर एक महिला का बलात्कार कर दिया था। तभी से लोग इस सेवा को असुरक्षित व अनियंत्रित मानते हैं।

परंतु और भी लोग अब इस ऑन डिमांड टैक्सी सेवा कि ओर रुख भी कर रहे हैं। इस कारण से दिल्ली के पारंपरिक ऑटो रिक्शा व टैक्सियों के व्यापार पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। इसी बात पर वे पिछले सप्ताह इन टैक्सी सेवाओं के विरुद्ध हड़ताल पर गये थे।

कुछ दिनों पहले, चीन ने कैब सेवाओं को हरी झंडी दिखायी थी। इससे पहले ऐसी सेवाएं कानूनी दायरे के ग्रे क्षेत्र में कार्य कर रही थीं।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन