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अब केरल सरकार कैब एग्रिगेटरों का नियंत्रण करेगी, बनायी ड्राफ़ट पॉलिसी

कर्नाटक सरकार के नक्शे कदम पर चलते हुए, केरल सरकार ने भी कैब ऐग्रिगेटरों को नियंत्रित करने के लिये, कुछ नये नियम बनाये हैं। और उन्होंने कई नियमों लिये कर्नाटक सरकार से ही प्रेरणा ली है।

इमनें से कुछ आवश्यक लाइसेंस, GPS का प्रयोग, सरकार द्वारा दाम का तय करना, ऐप में पैनिक बटन, आदि हैं। LiveMint की एक रिपोर्ट के अनुसार, केरल सरकार इन नियमों को कानून बनाने से पहले सभी स्टेकहोल्डरों से एक बार वार्तालाप करेगी।

ड्राफ़ट पॉलिसी में कैब ऐग्रिगेटर को एक ऐसा डिजिटल मध्यस्थ बताया गया है, जो कि यात्रियों को राज्य सरकार के नियमों के अनुसार मान्यता प्राप्त कैब चालकों से जोड़े। डिजिटल माध्यम कोई भी हो सकता है – मोबाइल ऐप्लिकेशनें, वेब ऐप्लिकेशनें, या कॉल सेंटर। टैक्सी कंपनियों को 1956 के कंपनीज़ ऐक्ट के अंतर्गत और IT ऐक्ट (2000) के अंतर्गत पंजीकरण करवाना होगा। कंपनियों को तीन सालों के लिये अपनी सेवा उपलब्ध कराने हेतु शुरवात में लाइसेंस मिल सकता है।

‘केरल ऑन डिमांड इन्फ़ॉर्मेशन तकनीक आधारित परिवहन स्कीम (2016)’ नाम के कागज़ात चालकों के लिये भी नियम बताते हैं। कैब चलाने वाले चालकों को भी परिवहन डिपार्टमेंट को हर वर्ष ₹100 का भुगतान करना होगा। कैब ऐग्रिगेटरों को यात्रियों की सरक्षा सुनिश्चित करने के लिये चालकों के ट्रैक रिकॉर्ड भी साफ़ रखने का भी ध्यान रखना होगा। किसी भी चालक द्वारा उत्पीड़न की शिकायत आने पर ऐग्रिगेटरों का लाइसेंस कैंसल करने का आवेदन भी था।

और तो और, ड्राफ़ट सरकार कैब ऐग्रिगेटरों के दाम भी सुनिश्चित करे इसका आवेदन भी था। इसपर बयान देते हुए, टॉमिन जे. थाचंकरी, केरल परिवहन डिपार्टमेंट के प्रमुख, जिन्होंने रिपोर्ट ड्राफ़ट करी, ने कहा:

“क्योंकि सराकर दाम सुनिश्चित करेगी, ऑनलाइन कैब ऑपरेटरों की सर्ज प्राइसिंग रुक जायेगी।”

Uber फिर से शायद इस नियम से ज़्यादा खुश न हो। और तो और, इसमें ऐसे और नियम हैं, जिनके कारण Uber फिर से किसी राज्य नियंत्रक से लड़ाई शुरू कर दे। दामों और लाइसेंसों के नियमों के साथ, नियमों में कैबों में GPS ट्रैकर, ऐप में पैनिक बटन, उपभोक्ताओं के लिये 24/7 कॉल सेंटर आदि अनिवार्य कर दिया है।

और तो और, Uber ने पहले ही कर्नाटक सरकार के विरुद्ध इन्हीं तरीकों के नियमों के कारण कर्नाटक न्यायालय में याचिका दर्ज करी है। कर्नाटक सरकार को अभी भी इसपर अपना बयान देना है, पर ऐसा लगता है कि Uber को केरल में भी ऐसा ही कुछ देखना पड़ेगा।

परंतु, Uber, केरल के जनरल मैनेजर नितिन नायर ने इस नयी ड्राफ़ट पॉलिसी को सरकार द्वारा मान्यता का रूप बताया है। एक बयान में नायर ने कहा:

“हमारा मानना है कि ऐप आधारित राइड हेलिंग सेवाओं के लिये, सरकार का नियम लाना इस क्षेत्र को मान्यता देना है और साथ ही शहरी मोबिलिटी लाने के हमारे प्रयास को भी। हम राज्य सरकार के साथ और पॉलिसी बनाने वालों के साथ कंस्ट्रक्टिव डायलॉग कर रहे हैं और आगे भी साथ कार्य करेंगे।”

Uber इस समय केरल के दो शहरों, कोच्ची और तिरुवनंथपुरम में कार्य कर रही है।

एक और कैब सेवा, Meru ने केरल सरकार के इस कदम की प्रशंसा करी है। Meru के निदेशक राहुल कपानी ने कहा:

“हम केरल के राज्य के टैक्सी/कैब ऐग्रिगेटरों को नियंत्रित करने के तरीके से बहुत प्रसन्न हैं। इससे पबलिक परिवहन में आयी दूरी मिटेगी और उपलब्धता बढ़ेगी, यात्रियों के लिये पार्दर्शिता और सुरक्षा बढ़ेगी और शहर की टैक्सियों के प्रति उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ेगा। और तो और, इससे लंबे समय के लिये एक समतल जगह मिलेगी, जहां सभी कैब ऐग्रिगेटर प्रतिद्वंद कर सकें।”

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन