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शिक्षा लोन जल्द उपलब्ध कराने में सहायता करने वाले स्टार्टप GyanDhan को छात्रों की सहायता करने के लिये सीड निवेश

शिक्षा लोन प्राप्त कर पाना कोई आसान काम नहीं है – और वो भी भारत में। इससे पहले कि छात्रों को पैसे मिलें, उन्हें अनेकों कागज़ात पूरे करने होते हैं और कई नियंत्रकों के अप्रूवल लेने पड़ते हैं। इस सिस्टम को बदलने का प्रयास कर रहे एक स्टार्टप GyanDhan को उनका कार्य सफलता से पूरा कर पाने में सहायता करने के लिये सीड निवेश प्राप्त हुआ है।

सीड निवेश में हिस्सा लेने वाले Stanford Angels and Entrepreneurs, Harvard Angels और Seedfund Advisors में साझेदार, प्रवीण गांधी थे।

कंपनी इस निवेश का प्रयोग अपना तकनीक मंच बहतर बनाने में और अपनी डेटा विज्ञान क्षमताओं को बढ़ाने में करेगी। वे नयी लोन ऑफ़रिंग भी लायेंगे। इसी पर बयान देते हुए कंपनी के सह संस्थापक अंकित महरा ने कहा:

“हम इस निवेश का प्रयोग अपना तकनीक मंच बहतर बनाने में करेंगे, जिससे बैंकों और छात्रों, दोनों का अनुभव बहतर हो, और अपनी डेटा विज्ञान क्षमताओं को बढ़ाने में करेंगे। हम आने वाले 12 महीनों में स्थानीय शिक्षा के लिये कम क्षमता वाली जेबों की सहायता करने हेतु नये लोन प्रोडक्ट लायेंगे।”

परंतु GyanDhan का यह पहला निवेश नहीं। इससे पहल उन्हें Cube और Citrus Pay के संस्थापक सत्येन कोठारी से निवेश प्राप्त हुआ था। पैसे को कंपनी को कॉन्सेप्ट चरण से पहले लोन तक लाने में प्रयोग किया गया था।

स्टार्टप, जो कि इस साल मई में शुरू किया गया था, छात्रों को विदेश में शिक्षा के लिये बिना किसी कोलैटरल ₹30 लाख तक का लोन लेने में सहायता करता है। इसे अंकित महरा ओर जैनेश सिन्हा ने स्थापित किया था। दोनों ही इससे पहले Capital One में पांच से अधिक वर्षों तक कार्य कर चुके हैं।

GyanDhan अपने प्रॉपराइटरी मॉडल से उच्च शिक्षा समान बना कर सभी तक पहुंचाना चाहती है, जिसके ज़रिये, बैंक छात्रों की नियुक्ती को परख कर बहतर निर्णय ले सकें। इन्होंने उच्च शिक्षा के लिये लोन देने हेतु कई वित्त संस्थानों से साझा किया हुआ है।

इनका दावा है कि ये अभी तक करीब 2500 आवेदन पूरे कर चुके हैं और छात्रों को इन वित्त संस्थानों से ₹10 करोड़ तक की सहायता उपलब्ध करा चुके हैं। छात्रों के आवेदन का जल्द से जल्द समाधान प्राप्त करने के लिये, कंपनी की टीम छात्रों और बैंक, दोनों के साथ करीब से कार्य कर रही है। कंपनी के संस्थापक ने कहा:

“हमने समझा कि पूरी प्रक्रिया में पार्दर्शिता की कमी होने के कारण छात्रों को बहुत परेशानी होती थी, और उच्चतम उपभोक्ता सेवा उपलब्ध कराने के लिये कुछ बैंकों से साझा करने का निर्णय लिया।”

SA&E की सह-प्रेज़िडेंट पॉला मारिवाला ने कहा:

“उच्च शिक्षा प्राप्त करने का प्रयास कर रहे छात्रों को भारतीय वित्त संस्थानों से फ़ंडिंग न मिल पाना सबसे बड़ी परेशानी है। अधिकतम बार, या तो बैंक किसी बहुत बड़े कोलैटरल की मांग करता है, या फिर लोन को प्रोसेस होने में बहुत समय लग जाता है। GyanDhan की मेरिट-आधारित उधारी, जिसमें छात्र की क्षमता देखी जाती है और एक ऐसी प्रक्रिया अपनायी जाती है, जिससे छात्र और इंगेज हों, शिक्षा लोन के लिये एक बहुत ही ज़रूरी विकल्प है।”

कंपनी के मुताबिक, भारतीय छात्र हर साल विदेशों में $14 बिलियन खर्च करते हैं, जिनमें बैंकों की मात्र 5% की हिस्सेदारी है। GyanDhan का मानना है कि ऊंचे NPA स्तरों के कारण, बैंक शिक्षा लोन बाज़ार में हिस्सा लेने से कतराते हैं।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन