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उच्चतम न्यायालय ने WhatsApp को बैन करने की याचिका रद्द करी, निवेदक को TDSAT के समक्ष जाने के लिये कहा

उच्चतम न्यायालय का भी यही मानना है कि WhatsApp को बैन करना एक हास्यास्पद प्रस्ताव है और इसके लिये आयी याचिका को खारिज कर दिया है। भारत के नागरिकों के वक्तव्य के अधिकार को ध्यान में रखते हुए, न्यायालय ने याचक को सरकार के पास जाने के लिये कहा है।

एक सप्ताह पहले ही से ख़बर आयी थी कि एक हरयाणा के सूचना-का-अधिकार (RTI) कार्यकर्ता सुधीर यादव ने भारत में WhatsApp बैन करने के लिये एक याचिका दर्ज करी है। उच्चतम न्यायालय में आयी इस याचिका का कारण कुछ ऐसा है, जो कभी न कभी सरकार के सामने आता ज़रूर। उनका मानना है कि WhatsApp का 256-बिट इनक्रिप्शन फ़ीचर वर्चुअली तोड़ा ही नहीं जा सकता है।

जहां बाकी की दुनिया इस कदम से खुश है, यादव का मानना है कि WhatsApp का इनक्रिप्शन देश की सुरक्षा के लिये एक बड़ा खतरा है। परंतु, उच्चतम न्यायलय भी इससे सहमत नहीं है। परंतु वे फिर भी इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि WhatsApp और ऐसी अन्य सेवाएं, भारतीय टेलेग्राफ़ ऐक्ट, 1885 और IT ऐक्ट, 2000 के नियमों का उल्लंघन कर रही हैं।

Hike, Secure Chat, Viber जैसी अन्य सेवाएं, जिनमें अधिक इनक्रिप्शन है, को भी केंद्रित किया गया है, क्योंकि ये भी देश की सुरक्षा को खतरे में डाल सकती हैं।

न्यायलय में अपनी याचिका में उन्होंने लिखा:

“अगर WhatsApp को खुद को भी इन चैटों को सरकार को खोल के देने के लिये कहा गया तो वे भी की के अभाव में ऐसा नहीं कर पायेंगे।”

उनका मानना है कि आतंकवादी भी इन सेवाओं का प्रयोग देश पर हमले की रणनीति तैयार करने के लिये कर सकते हैं और हम इससे संबंधित कोई जानकारी भी नहीं हासिल कर पायेंगे। उन्होंने जोड़ा कि यदी हम सूपर कंप्यूटरों का प्रयोग कर इन एंड-टू-एंड इनक्रिप्ट किये गये मेसेजों को डीक्रिप्ट करने का प्रयास करें, तो वो भी संभव नहीं है, क्योंकि इसके लिये सैकड़ों साल लग जायेंगे।

और अगर आपको अंकों का शौक है तो जान लीजिये कि 256-बिट इनक्रिप्शन को खोलन के लिये आपको 115, 792, 089, 237, 316, 195, 423, 570, 985, 008, 687, 907, 853, 269, 984, 665, 640, 564, 039, 457, 584, 007, 913, 129, 639, 935 अंकों की ज़रूरत पड़ेगी। (हे भगवान!)

उच्चतम न्यायालय ने यादव को इस याचिका के साथ, Telecom Disputes Settlement and Appellate Tribunal (TDSAT) के समक्ष जाने के लिये कहा है।

और जैसा कि हम पहले कर चुके हैं, यदी हम आतंकवादियो के डर से इंटरनेट मेसेजिंग ऐप्लिकेशनों को बैन करते हैं, तो वो तो हममें दहशत फैलाने के अपने उद्देश्य में सफल हो रहे हैं। तो हम तो उच्चतम न्यायलय द्वारा लिये गये निर्णय को अपना पूरा समर्थन देते हैं।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन