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लेऑफ़ करने वालों में Grofers नवीनतम, 10% नौकरियां काटी गयीं, 67 कैंपस ऑफ़र वापस लिये गये

कुछ समय की शांती के बाद, Grofers के लिये फिर परेशानियां खढ़ी हो गयी हैं। अनेक सूत्रों से आयी ख़बर के अनुसार, Grofers अपने तकरीबन 10% कार्य फ़ोर्स को निकाल रहा है। अगर सच हुआ, तो ये किराना डिलिवरी क्षेत्र की दुर्दशा का एक और प्रमाण सिद्ध होगा और लेऑफ़ तो होता ही पैसे बचाने और अपनी जेब पर दबाव कम करने का एक तरीका है।

Inc42 के मुताबिक, जो कि निकाले गये कर्मचारियों को अपना सबसे बड़ा सूत्र बताते हैं, सभी कर्मचारियों को एक मेल भेजा गया था, जिसमें लिखा था कि निकट भविष्य में 10% कर्मचारियों को लेऑफ़ किया जा सकता है। उसके बाद निजी साक्षात्कार हुए, जहां कर्मचारियों को विकल्पों की जानकारी दी गयी – जो कि स्वयं इस्तीफ़ा देने या फिर लेऑफ़ को मानने तक ही सीमित थे।

कमाल की बात ये है कि निकाले गये कर्मचारियों में अधिकतम Grofers डिलिवरी और उपभोगता रिलेशन मैनेजिंग टीमों से थे। इन डिपार्टमेंटों में लेऑफ़ों से ये पता चलता है कि कंपनी बहुत से ऑर्डरों या उपभोक्ताओं के बोझ तले दब नहीं रही है। साथ ही, 10% लेऑफ़ से पता चलता है कि इनकी कार्य क्षमता व्यर्थ है।

हाल के समय में Grofers सारे ग़लत कारणों से चर्चा में रही है। पहले तो क्योंकि कंपनी ने अनेकों शहरों में ऑपरेशन ख़तम कर दिये थे, फिर क्योंकि इन्होंने अपने ऑपरेशनों के साइज़ को कम किया और हाल ही में, क्योंकि इन्होंने कॉलेजों से 2016 के नौकरी के प्रस्ताव वापस ले लिये। अब, हम ऐसा तो नहीं कह सकते कि लेऑफ़ अचानक ही आ गये, परंतु ये ज़रूर कहेंगे कि ये उन लोगों के लिये निराशा थी, जो ये उम्मीद कर रहे थे कि Grofers बहुत अच्छी वापसी करेंगे।

वहीं, कंपनी को संभावित नियुक्तियों के आक्रोश को झेलना पड़ रहा है, जो कंपनी को अंत समय में नौकरियों के प्रस्ताव को वापस लेने के कारण कंपनी की समाजिक रूप से निंदा कर रहे हैं। भले ही कंपनी ने खराब बाज़ार कंडिशन को इसके पीछे का मुख्य कारण बताया – जो कि समझा भी जा सकता है – परंतु बुरी बात तो ये थी कि कंपनी ने जॉइनिंग के दिन सभी को बताया कि उनकी सेवाओं की आवश्यक्ता नहीं है। एक बहुत ही बुरी कार्य प्रणाली।

मुद्दे पर बात करते हुए Grofers के मार्केटिॉग के AVP, प्रशांत वरिमा ने बताया:

“हमने कुल 67 ऑफ़र वापस लिये हैं। हम कंपनी में कुछ रणनैतिक बदलाव ला रहे हैं। हम बाज़ार के माहौल और पुनः रिवाइज़ किये प्रोजेक्शनों के अनुसार डाउनसाइज़ कर रहे हैं। तो, ये उसके कराण है कि इतने सारे बदलाव किये गये हैं और हमने पहले दिये गये प्रस्तावों को वापस ले लिया।”

लेऑफ़ हाल ही में चल रही कंपनी की बुरी हालत के कारण भी हो सकते हैं। नवंबर 2015 में जापान के SoftBank की अगुवाई में $120 मिलियन (₹780 करोड़) हासिल करने के बाद – और 27 शहरों मे विस्तार करने के बाद – Grofers को जनवरी में नौ शहरों में अपने ऑपरेशन बंद कर दिये थे। और इस नवीनतम खबर के बाद, ऐसा लगता है कि कंपनी अभी तकलीफ़ों से पूरी तरह नहीं उबरी है।

बहरहाल, हम इन लेऑफ़ों पर Grofers के अधिकारिक बयान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस विषय में और जानकारी के लिये, जुड़े रहें।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन