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IAMAI ने GST बिल की निंदा करी, कहा कि ये भारत की अर्थव्यवस्था को बस के नीचे धकेल देगा

भारतीय इंटरनेट व मोबाइल असोसियेशन (IAMAI) जो कि पहले GST बिलों में किये जाने वाले बदलावों के समर्थन में थे, अब उन्हीं बदलावों की निंदा कर रहे हैं। संसद के मॉनसून सत्र में प्रस्तूत होने वाला गुड्स व सेवा कर (GST) बिल भारत की इंटरनेट अर्थव्यवस्था को नष्ट कर देगा।

अगर आपको पता न हो, तो IAMAI एक लाभ-के-लिये-नहीं संस्थान है, जिसमें Facebook, Microsoft, Google, Flipkart और Hungama जैसी कंपनियां और उनके मेंबर शामिल हैं। 2014 में स्थापित IAMAI, ऑनलाइन व मोबाइल वैल्यू ऐडेड सेवाओं के विस्तार और बहतरी ले लिये कार्य कर रहे हैं। इसका नेतृत्व अब Freecharge के संस्थापक कुणाल शाह कर रहे हैं।

नया GST बिल मुद्दे की तह तक पहुंचने में ही असफल है और Facebook, Google, Zomato और ऑनलाइन रिव्यू वेबसाइटों को बंदूक की नोंक पर रख रहा है। इसमें लिखा गया है कि ये वेबसाइटें ही मंच पर उपलब्ध कंटेंट के लिये ज़िम्मेदार हैं।

IAMAI द्वारा जारी किये गये बयान के अनुसार:

“नया GST बिल ‘एजंटों’ जैसे कार्य करने वाली कंपनियों, जो कि किसी और की तरफ़ से ‘सामानों और/या सेवाओं की सप्लाय या प्राप्ती का व्यापार चलाते हैं’ को एक क्लब में करता है और उन्हें कमिशन एजंटों और ब्रोकरों के स्तर से कंपेयर करता है।”

अब IT Act 2000 के सेफ़ हार्बर प्रोविज़न पर नज़र डालें तो उसमें लिखा है कि कोई भी मध्यस्थ वेबसाइट पर डाले गये किसी भी थर्ड पार्टी जानकारी, डेटा या कम्युनिकेशन के लिये ज़िम्मेदार नहीं है। आसान भाषा में बोला जाये तो Google, Facebook व Twitter जैसे मंच अनेकों मिलियन उपभोक्ताओं द्वारा डाले गये पोस्ट के लिये ज़िम्मेदार नहीं हैं।

परंतु GST बिल ऊपर दिये गये IT Act के नियमों के द्वारा दिये गये ‘डिजिटल मध्यस्थों’ के नियम के बिलकुल ही विपरीत है। इसमें ऐसी वेबसाइटों व मंचों को ‘एजंट’ का दर्जा दिया गया है और कहा गया है कि वे अपने उपभोक्ताओं द्वारा डाले गये कंटेंट का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसी कराण से ये इन वेबसाइटों पर डाले गये किसी भी कंटेंट के लिये ज़िम्मेदार हैं।

IAMAI ने तो ये भी कहा कि लागू होने पर, ये बिल भारत में व्यापार को और भी मुश्किल बना देगा। उन्होंने ये भी कहा कि:

“ये मंच द्वारा उपलब्ध करायी गयी मुफ़्त व आसान होस्टिंग को रोक देगा। ऐसी ही बाधाएं सोशल नेट्वर्किंग साइटों व दूसरे मंचों पर भी लगा दी जायेंगी।”

GST बिल, जिसे सरकार के अनुसार मजॉरिटी से पास कर दिया जायेगा, ऑनलाइन व्यापारों के लिये एक भयानक सरप्राइज़ के रूप में आया है। बिल भारत में इंटरनेट सेवाओं की वजह से आये भारतीय व्यापार में बूम और यहां की डिजिटल बढ़ोत्तरी को पहचानने में असक्षम है। ये तो अंततः “डिजिटल भारत” और “स्टार्टप भारत” मुहिमों से एक कदम पीछे खींचने जैसा हो गया।”

इसी लिये, ज़रूरत है कि सरकार GST बिल में इस इंकंसिस्टेंसी के मुद्दो पर ध्यान दे। उन्हें IT Act के सेफ़ हार्बर नियमों को और मज़बूत बनाने कि ओर कदम बढ़ाना पड़ेगा।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन