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“नेट न्यूट्रैलिटी” के अनेक कथनों के मध्य, भारतीय उच्चतम न्यायालय को जल्द ही सुननी होगी WhatsApp बंद करने के लिये याचिका

और जैसे ही हमें लगे कि ये और बुरा नहीं हो सकता था, लोग अपने हास्यास्पद कार्यों से हमें ग़लत साबित कर देते हैं। और हां, वे ‘कार्यकर्ता’ हैं। और, जैसे कि उनके पास और कुछ था ही नहीं, ET की रिपोर्ट के मुतबिक, भारतीय उच्चतम नियालय को भारत में WhatsApp बैन करने के लिये एक याचिका सुननी होगी।

और आप इसके पीछे के कारण को जानने कर और भी चौंक जायेंगे। हरयाणा के सूचना का अधिकार कार्यकर्ता सुधीर यादव की ये याचिका, खुद को WhatsApp द्वारा लागू करी गयी वर्चुअली न तोड़ी जा सकने वाली 256-बिट इन्क्रिप्शन पर बेस करती है।

हां! जहां बाकी कि दुनिया इस बात की खुशी मना रही है कि उनके निजी विचार व बातें अब अधिकतम सरकारी एजंसियां नहीं पढ़ पायेंगी, श्रीमान यादव को इस बात से ऐतराज़ है।

“अगर WhatsApp को भी व्यक्ति के मेसेज खोल कर सरकार को देने के लिये कहा जाये तो वो भी ये नहीं कर पायेंगे, क्योंकि उनके पास भी डीक्रिप्शन की नहीं होगी।”

उनका कहना है कि आतंकवादी व गुनहगार इसका प्रयोग दहशत फैलाने के लिये कर रहे होंगे और सराकर के पास इनक्रिप्शनों के कारण इन मेसेजों तक पहुंचे का कोई साधन नहीं है।

याचिका में अधिक इनक्रिप्शन करने वाले दूसरे मंचों, जैसे कि Hike, Secure Chat, Viber आदि के नाम भी हैं, जो कि श्री यादव के मुताबिक राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये खतरा हैं।

जी हां, इसको सुन कर हमें बहुत सी कहावतें याद आती हैं, जैसे कि अध जल गगरी छलकत जाये आदि, पर हम उन्हें यहां बताने से बचेंगे। उल्टा हम आपको ये सोचने पर मजबूर करेंगे।

इस समय सैकड़ों मेसेजिंग ऐपें उपलब्ध हैं और सिर्फ़ उनकी संख्या ही सरकार के लिये हर एक मेसेज को देखना नामुमकिन बना देती है। ये कहने के बाद, WhatsApp शायद सबसे प्रचलित मेसेजिंग ऐप्लिकेशनों में से है और हमें ये तो नहीं पता कि आतंकवादी अपनी योजनाओं को पूरा करने के लिये इसका प्रयोग कर रहे हैं या नहीं, पर हमें ये पता है कि आम जनता का एक बहुत बड़ा हिस्सा है जो अपनी हर बात इसके माध्यम से शेयर करता है।

और मान लिया जाये कि इन वर्बल कारणों पर सराकर WhatsApp को बैन कर भी दे। अगला क्या होगा? लैंडलाइनों पर बैन क्योंकि वे अटैक प्लान करने के लिये प्रयुक्त हो सकते हैं? निजी वाहनों पर भी बैन? और सत्य कहा जाये तो, ये सीन कि कुछ आतंकवादी एक गुफ़ा में बैठ कर आतंकी हमले की तैयारी कर रहे हैं, कुछ सच्चा नहीं प्रतीत होता।

यहां ये ज़रूर कहेंगे कि आतंक को रोकना बहुत ज़रूरी है। परंतु ये आम जनता के हक़ों की कीमत पर नहीं होना चाहिये, उनके व्यक्त करने के अधिकार, बात करन के अधिकार की कीमत पर नहीं होना चाहिये ,जो कि भले ही कहा न जाये, पर WhatsApp जैसी ऐप्लिकेशनें जिनका प्रतीक हैं।

परंतु, अगर हम आतंकवादियों के आतंक फैलाने के डर से इंटरनेट मेसेजिंग ऐप्लिकेशनों को बैन कर दें, तो वे हमें दहशत में लाने के अपने उद्देश्य में सफल हो जायेंगे।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन