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SoftBank ने निकेश अरोड़ा को दी क्लीन चिट, निवेशकों के दावों को आधारहीन बताया

टोक्यो स्थित इंटरनेट दानव SoftBank Group Corp. ने सोमवार को ये घोषणा करी कि प्रेज़िडेंट निकेष अरोड़ा के विरुद्ध शेयरहोल्डरों के इल्ज़ामों को रिव्यू करने के लिये बैठायी गयी कमेटी अपने निर्णय तक पहुंच चुकी है। उन्होंने निकेष को निर्दोष करार दिया और कहा कि उनपर लगे सारे इल्ज़ाम बेबुनियाद हैं।

इससे पहले, कुछ SBG और Sprint Corp शेयरहोल्डरों ने तकनीक दानव को अनेक पत्र भेज कर प्रेज़िडेंट पर कुछ इल्ज़ाम लगाये थे। पत्रों में उनके ट्रैक रिकॉर्ड व क्वॉलिफ़िकेशनों के आधार पर एक प्रोब और अरोड़ा की संभव बर्ख़ास्तगी की मांग करी गयी थी। निवेशकों ने अरोड़ा के बुरे निवेश प्रदर्शन और उनके कार्यकाल के दौरान प्रश्न उठाने लायक ट्रांज़ैक्शनों की भी निंदा करी।

परंतु कंपनी द्वारा जारी किये गये बयान के मुताबिक,

“विशेष कमेटी इस निर्णय पर पहुंची है कि श्रीमान अरोड़ा पर SBG के उनके कार्यकाल के दौरान आचरण पर उठे सभी प्रश्न बेबुनियाद हैं।”

विशेष कमेटी को फ़रवरी में बैठाया गया था, इन आरोपों के लगने के चंद दिनों बाद ही। इन्होंने Shearman & Sterling LLP और Anderson Mori & Tomotsune के स्वतंत्र परामर्श की सहायता से रिव्यू किया है।

ये परिणाम चौंकाने वाला नहीं, क्योंकि SoftBank ने शुरू से ही अरोड़ा का साथ दिया है। उन्होंने तब भी उनका साथ दिया जब इन पत्रों को अप्रैल नें सार्वजनिक किया गया था। और तो और सी.ई.ओ. मासायोशी सॉन ने भी ये कहते हुए एक बयान जारी किया की:

“मुझे निकेष पर पूरा भरोसा है और एक हज़ार प्रतिशत विश्वास है कि वे भविष्य में SoftBank में अनेकों बड़े कार्य करेंगे।”

और सॉन ने एक बार फिर अरोड़ा पर अपने विश्वास की गवाही देते हुए निम्नलिखित बयान जारी किया है।

“इन आरोपों के सार्वजनिक होते समय जैसा मैनें कहा था, मुझे निकेष पर पूरा भरोसा है और मुझे बहुत प्रसन्नता है कि विशेष कमेटी ने इन आरोपों को ग़ौर से परखा और उन्हें बेबुनियाद करार दिया।”

इतना बवाल क्यों?

हम वापस चलते हैं 2014 में जब अरोड़ा टोक्यो की इस विशाल कंपनी से जुड़े थे। सॉन – जापान के सबसे अमीर लोगों में से एक – ने उन्हें SoftBank में अपने उत्तराधिकारी के रूप में सबसे प्रथम दावेदार माना था।

परंतु अरोड़ा के अपना पद ग्रहण करने के कुछ समय बाद, कुछ अज्ञात SoftBank और Sprint (जो कि SoftBank का ही एक हिस्सा है) ने उनकी ईमांदारी पर प्रश्न उठाने शुरू कर दिये और उनके प्रती चिंता जताना शुरू कर दिया। वे US की टेलेकॉम कंपनी Sprint Corp के निदेशक भी थे और संपष्ट रूप से बोर्ड को एक ऐसे निवेशक का पत्र मिला, जो कि अरोड़ा को निदेशक पद से हटाना चाहते थे।

निवेशकों ने अरोड़ा के बुरे निवेश पर्फ़ामेंस पर प्रश्न उठाये और उनके कार्यकाल में पूरे किये गये ट्रांज़ैक्शनों को कठगरे में खड़ा किया। कुछ अनाम निवेशकों ने उनके खतरनाक और असहनीय क्षतिपूर्ती पर भी प्रश्न उठाये।

परंतु SoftBank ने सदैव अरोड़ा का सार्वजनिक रूप से बचाव किया और कहा कि उनका कौशल इतनी बड़ी प्रतिपूर्ती का पूरक है। और साथ ही, ये कंपनी का निर्णय है कि किसे कितना वेतन मिलना चाहिये।

परंतु अब अरोड़ा सभी इल्ज़ामों से मुक्त हैं।

निकेष अरोड़ा को SoftBank के पैसे को भारतीय स्टार्टप ईकोसिस्टम कि ओर लाने का श्रेय जाता है। SoftBank इस समय भारतीय स्टार्टपों में सबसे बड़े निवेशकों में से एक है और Snapdeal, Ola, InMobi, OYO Rooms और Housing.com में $2 बिलियन का निवेश कर चुका है।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन