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भारत सरकार के सीड निवेशों पर ‘एंजल कर’ हटाने से निवेशकों ने भरी रहात की सांस

स्टार्टपों व उद्यम से संबंधित पॉलिसियों के तहत ही, भारत सरकार ने कथित ‘एंजल कर’ को हटा देने की घोषणा करी है।

लगता है कि इस कदम से देश में उद्यम बढ़ाने और साथ ही और भी रोज़गार बनाने का प्रयास किया जा रहा है। अब, स्टार्टपों के निवेश के अंकित मूल्य से ऊपर जाने के बाद भी उन्हें कर नहीं देना पड़ेगा। परंतु गिरते वैल्युएशनों के कारण कर अधिकारी अभी भी पुराने वैल्युएशन को वास्तविकता से अधिक वैल्युएशन होने की वजह से पिछले निवेशों पर प्रश्न उठा सकते हैं।

सीड निवेशों के लिये कर नियम ये था कि स्थानीय एंजल निवेशों को स्टार्टपों के लिये आय समझा जाता था। इसी लिये, दुनिया भर में भारत एकमात्र ऐसा देश था जो एंजल निवेशकों को इस तरह से दंडित करता था।

पूर्व निर्धारित नियमों के अनुसार, एक्विटी जारी कर के निवेश जुटाने वाली बिना सूचीबद्ध कंपनियों को भी इन करों का भुगतान करना पड़ता है। ये इस हद तक कवर है कि अनुकूल बाज़ार वैल्यू से अधिक राशि पर भी कर लगता है।

वे लोग जो वेंचर कैपिटल फ़र्मों के रूप में पंजीकृत नहीं हैं, वे अब राहत की सांस ले सकते हैं। अब उन्हें अपने निवेशों पर कर लगने की चिंता नहीं करनी होगी। इनमें निवासी एंजल निवेशक, स्थानीय पारिवारिक ऑफ़िस और स्थानीय निवेशक हैं।

आयकर ऐक्ट के सेक्शन 56(2) के अनुसार, अधिक आय “दूसरे स्त्रोतों से आय” के रूप में कर योग्य है। इसलिये ये कॉरिपोरेट कर दर पर टैक्स लगाते थे, जो कि कुल 30% हो जाता था। इसी लिये वेंचर कैपिटल फ़र्म इस कर को हटवाने के प्रयास में लगे हुए थे।

शुरवाती दौर के स्टार्टप या किसी भी स्टार्टप का बाज़र वैल्युएशन हमेशा मार्केट वैल्यू से अधिक होता है। ये क्योंकि ये आइडिया व उसकी क्षमता पर होता है, न कि उसकी बाज़र की कीमत पर। इसी वजह से, स्टार्टप इस ‘एंजल कर’ के कारण निवेश का एक हिस्सा खो देता है।

इसी लिये , सीधे कर के केंद्रीय बोर्ड ने स्टार्टपों को सेक्शन 56(2)(viib) से हटा दिया है।

निवेशक सरकार द्वारा लिये गये इस निर्णय से खुश हैं। इस लंबे समय से मांगे जा रहे बदलाव का सभी स्वागत कर रहे हैं।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन