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भारत में वर्ष-दर-वर्ष का निजी एक्विटी कैश फ़्लो धीमा, 25% की गिरावट: Goldman Sachs

HAMILTON, NEW ZEALAND - MARCH 10: An India flag is seen during the 2015 ICC Cricket World Cup match between Ireland and India at Seddon Park on March 10, 2015 in Hamilton, New Zealand. (Photo by Anthony Au-Yeung-IDI/IDI via Getty Images)

अमेरिका के एक मुख्य वित्त खिलाड़ी Goldman Sachs ने आज एक रिपोर्ट लांच करी जिसके अनुसार भारतीय स्टार्टपों में निजी एक्विटी निवेश की दरों मे गिरावट आयी है। इसमें 25% YoY (वर्ष-दर-वर्ष) की गिरावट आयी है, जो कि 2015 के $2.5 बिलियन से गिर कर 2016 में $1.9 बिलियन ही रह गयी है।

रिपोर्ट में आगे कहा गया कि भले ही वर्ष-दर-वर्ष के हिसाब से डील की संख्याओं में 52% की बढ़ंत हो, परंतु औसतन डील का माप घटा है। ये तकरीबन आधा होकर मात्र $4.3 मिलियन ही रह गया है। इससे हाल ही में आये स्टार्टपों की बढ़ंत में धीमेपन का पता चलता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय ई-कॉमर्स को 2014 के $6 बिलियन के मुकाबले 2015 में करीब $8.4 बिलियन का कैपिटल आगमन मिला था। परंतु इनका ये भी कहना है कि स्टार्टपों में आगमन 2015 में $4 बिलियन पहुंचने के बाद धीमा होने लगा था।

निजी एक्विटी से निवेश में आयी कमी का प्रभाव भारतीय स्टार्टपों के बी व सी सत्र के निवेशों पर पड़ रहा है (जो कि बढ़ंत व विस्तार के चरण हैं)। ए, बी व सी सत्र की डीलों की संख्या 2015 के 94 से गिर कर इस वर्ष 73 हो गयी है।

इसके कारण कंपनियों को ‘दुकान बंद करने’ से बचने के लिये भीषण कदम उठाने पड़े हैं। उन्होंने कैश बर्न में कमी लाकर ऑपरेशन को पुनः स्ट्रक्चर किया है, जिससे कि वे लाभ प्राप्त कर सकें।

स्टार्टप इंडस्ट्री के नये खिलाड़ियों को विस्तार करने और कैपिटल प्राप्त करने में परेशानियां हो रही हैं। वहीं वे कंपनियां, जो कि अपने ऑपरेशन बढ़ाने में सफल रही हैं, उनको निवेश जुटाने में किसी बाधा का सामना नहीं करना पड़ रहा। और कुछ केसों में, ये कंपनियां कमज़ोर कंपनियों को अधिग्रहित कर अपने ऑपरेशन को और बढ़ा रही हैं।

भारतीय ई-कॉमर्स परिदृश्य

एशिया-पैसिफ़िक क्षेत्र में ई-कॉमर्स ने 2014 से अभूतपूर्व बढ़ंत देखी है। वैश्विक रूप से, चीन व भारत की अगुवाई में इस व्यापार के 2020 तक 20% की वृद्धी देखने के अनुमान लगाये जा रहे हैं।

2020 तक भारत में ई-कॉमर्स कुल रीटेल के 3% का ज़िम्मेदार होगा। और तो और, प्रति मिलियन ऑर्डर 2013 के पांच मिलियन के दुगने से भी अधिक होकर 2016 के अंत तक 12 मिलियन होने की संभावना है। ई-कॉमर्स कंपनियां अब FDI दिशानिर्देशों के कारण, अब छूटों से दूर होकर लाभ कि ओर केंद्रित हो रहे हैं।

इस समय Flipkart और Amazon देश के उच्चतम ई-कॉमर्स मंच के पायदान के लिये प्रतिद्वंद कर रहे हैं। एक तरफ़ जेफ़ बेज़ोस ने अपने भारतीय अंग के लिये $3 बिलियन का निवेश अलग किया है। वहीं दूसरी ओर, Flipkart अनेकों डिवैल्युएशनों के साथ भी, इस पश्चिमी दानव से लड़ने के प्रयास में है।

कंपनी ने हाल ही में अपनी वापसी की पॉलिसी में बदलाव लाये हैं और ये प्रति वापस किये प्रोडक्ट के लिये विक्रेता से शिपिंग फ़ी व कलेक्शन फ़ी वसूल रहे हैं। इन्होंने अपने लॉजिस्टिक्स अंग eKart के eKart Couriers के साथ कोरियर डिलिवरी में भी प्रवेश ले लिया है। साथ ही, प्रोडक्ट वापसी की अवधि इन्होंने तीस दिनों से घटा कर दस दिन कर ली है।

PayTM, Snapdeal व दूसरों के आने से भारतीय ई-कॉमर्स बाज़ार ने बहुत वृद्धी देखी है। इस समय Flipkart और Amazon दोनों ही गुजरात सरकार के साथ कानूनी लड़ाई में भी बंधे हुए हैं। ये उनके ऊपर लगाये गये 5% प्रवेश कर के कारण।

तो, इस रिपोर्ट का परिणाम ये है कि वेंचर बाज़ार के तर्क के आधार पर निर्णय लेने के कारण, भारतीय स्टार्टप ईको सिस्टम समेकन के दौर में प्रवेश कर रहा है।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन