ई-कॉमर्स खबर

सरकारों के प्रवेश कर के विरुद्ध Amazon ने Flipkart से मिलाये हाथ, गुजरात सरकर के विरुद्ध दर्ज किया मुकद्दमा

अनेक सरकारों द्वारा प्रवेश कर लगाने के विरुद्ध कई ई-कॉमर्स कंपनियां अब सामने आ रही हैं। Flipkart ने पहले ही कई स्थानीय सरकारों के विरुद्ध केस दर्ज किया हुआ है और अब Amazon भी इस लड़ाई से जुड़ गयी है। ET की एक रिपोर्ट के मुताबिक, Amazon ने इस कर के “पूरे मतलब व कॉनिसेप्ट पर प्रश्न उठाते हुए” गुजरात सरकार के विरुद्ध मुकद्दमा दर्ज किया है।

गुजरात सरकार ने मार्च 31, 2016 में एक बिल पास किया है जिसके अनुसार ई-कॉमर्स पोर्टलों से खरीदे गये सभी सामानों पर प्रवेश कर लगाया जायेगा। Amazon केस से वाक़िफ़ एक व्यक्ति ने ET को बताया:

“Amazon मात्र एक ज़रिया है, जो ख़रीददारों को विक्रेताओं से जोड़ता है और न हि आयातक और न उपभोक्ता है, साथ ही, इनका उस सामान से कुछ भी लेना-देना नहीं है। ये ऐसा केस नहीं है जहां Amazon कुछ खरीद या बेच रहा हो। कर उन लोगों पर लगना चाहिये जो कि सामान का आयात करा रहे हैं।”

Flipkart ने पहले ही गुजरात सरकार पर इसी कारण से मुकद्दमा किया हुआ है। गुजरात सरकार के साथ ही, अनेक सरकारों ने ई-कॉमर्स कंपनियों पर प्रवेश कर लगाया है। इनमें पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मिज़ोरम, असम, बिहार, ओड़िषा, राजस्थान और उत्तराखंड शामिल हैं।

क्यों सरकारें ई-कॉमर्सों पर प्रवेश कर लगा रही हैं

ई-कॉमर्स प्रवेश कर ऑनलाइन खरीदे गये सामान पर लगाया जायेगा। राज्य सरकारों ने इसका बचाव ये कहते हुए किया है कि इस कर से ऑफ़लाइन विक्रेताओं के साथ ये समान स्तर पर प्रतिद्वंद कर सकेंगे।

ये विक्रेता कुछ समय से इन ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों का विरोध कर रहे हैं। इन्होंने इन कंपनियों पर भारी छूट देकर ऑफ़लाइन व्यापार को प्रभावित करने का आरोप लगाया।

इन करों के पीछे एक और कारण इनसे आ रहा संभावित लाभ है। क्योंकि ई-कॉमर्स भारत में अभी भी तुल्नात्मक तौर पर नया है, राज्य सरकारों ने हाल ही में इनपर कर लगाना शुरू किया है।

ऑनलाइन शॉपिंग क्षेत्र में इतने विकास को देखते हुए राज्य सरकारें भी इनके मुनाफ़े से कमाने के विचार में हैं। उदाहरण के तौर पर, उत्तर प्रदेश सरकार, जिन्होंने ई-कॉमर्स कंपनियों पर हाल ही में 5% का प्रवेश कर लगाया, 2016-17 के दौरान करीब ₹600 करोड़ के रेवेन्यू की उम्मीद कर रही है।

ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा इस कर का विरोध

परंतु ई-कॉमर्स कंपनियों, ऑनलाइन व्यापार नियंत्रकों और NASSCOM ने इस कर के प्रति विरोध दर्ज किया। इसके पीछे का मुख्य कारण ये है कि ये मंच मात्र बाज़ार हैं और सीधे उपभोक्ताओं को सामान बेचते नहीं।

भारतीय कॉमर्स व इंडस्ट्री चेम्बर्स के फ़डरेशन (FICCI) के सेक्रेटरी जनरल डॉ॰ ए दीदार सिंह के मुताबिक, ऐसे कर राज्य के रेवेन्यू पर शायद ही प्रभाव डालें, पर अंतर-राज्यीय व्यापार को अस्त व्यस्त कर देंगे और बाज़ार ऐक्सेस में बाधा डालेंगे।

“ई-कॉमर्स केंद्रित कोई भी विशेष कर भारतीय MSMEयों को मिल रहे लाभ को नकारता है और अंत उपभोक्ताओं के भी, क्योंकि कर की वृद्धी से सामान और भी महंगा हो जायेगा।”

दीदार सिंह ने कहा।

साथ हा, ये कर उसी समय तक के लिये है, जब तक कि GST कर सुधार लागू नहीं हो जाता। और ई-कॉमर्स कंपनियों को इन करों को अपने सिस्टम से जोड़ने के लिये अपनी पॉलिसी में बहुत से बदलाव लान पड़ेंगे।

Flipkart ने गुजरात सरकार से पहले उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल राज्य सरकारों पर मुकद्दमा किया हुआ है। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने Flipkart के पक्ष में निर्णय लेकर सरकार के आदेश पर रोक लगा दी थी।

परंतु, पश्चिम बंगाल सरकार इस निर्णय के विरुद्ध उच्चतम न्यायालय कि ओर जाने वाली है। भविष्य में दुसरी सरकारों भी ये कदम उठा सकती हैं।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन