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ISRO ने किया अपने पुनः प्रयोग हो सकने वाले लांच वाहन की तकनीक का सफल प्रदर्शन

यह दिखाते हुए कि कैसे कम दाम की अच्छी तकनीक का प्रयोग कर के भी, अंतरिक्ष की गहराइयां छानी जा सकती हैं, ISRO ने सफलतापूर्वक अपने पुनः प्रयोग हो सकने वाले लांच वाहन का तकनीक प्रदर्शन मिशन पूरा किया।

“लक्ष्य सफलतापूर्वक प्राप्त।”

सुबह 7 बजे की RLV-TD HEX-01 की सफल उड़ान के बाद एक भारतीय अंतरिक्ष शोध संस्थान (ISRO) के वक्ता ने PTI को बताया।

रीयूज़ेबल लांच वेहकल-टेक्नॉलॉजी डेमॉन्स्ट्रेशन या RLV-TD तकनीक प्रदर्शन मिशनों की एक श्रृंखला है, जो कि Two Stage To Orbit (TSTO) के पुनः प्रयोग हो सकने वाले लांच वाहन की स्थापना का पहला चरण है।

पंखों वाले इस रीयूज़ेबल लांच वेहकल-टेक्नॉलॉजी डेमॉन्स्ट्रेटर (RLV-TD) को उड़ते हुए टेस्ट बेड की तरह कंफ़िगर किया गया है, अनेकों तकनीकों को इवैल्यूएट करने के लिये, जिनमें हायपरसॉनिक उड़ान, स्वचलित लैंडिंग, पॉवर करी गयी क्रूज़ उड़ान और हवा से चलने वाले प्रोपल्शन के प्रयोग से हायपरसॉनिक उड़ान जैसी तकनीकें शामिल हैं।

यह पहली बार है कि ISRO ने कोई पंखों वाला उड़ान वाहन लांच किया हो, जो कि किनारों से 500 किलोमीटर दूर बंगाल की खाड़ी के अपने वास्तविक रनवे पर आ गया। हायपरसॉनिक उड़ान प्रयोग के नाम से जाना जाने वाला ये मिशन उड़ान से लैंडिंग तक 10 मिनट लंबा था।

परंतु ISRO एकमात्र ऐसा नहीं जिन्होंने ये लक्ष्य प्राप्त किया है। Amazon के Blue origins, जो कि एक निजी अंतरिक्ष कंपनी है, ने भी ये सफलतापूर्वक किया है – वो भी तीन बार – वो भी असली रॉकेटों के साथ। वहीं दूसरी ओर आज परीक्षित हुआ ISRO का RLV-TD मिशन वास्तविक पुनः प्रयोग हो सकने वाले लांच वाहन का एक और भी किफ़ायती संस्करण है।

परंतु, ISRO के मिशन जैसे ही, ये और SpaceX के Falcon मिशनों को बिना उनके अंदर मनुष्य की उपस्थिती के ही परखा गया है।

ISRO ने कहा कि ये पुनः प्रयोग हो सकने वाली तकनीक का विकास, चरणों में, परीक्षण उड़ानों के साथ होगा। इस प्रयोगआत्मक उड़ानों की श्रृंखला में पहला हायपरसॉनिक उड़ान प्रयोग (HEX) था, जिसके बाद लैंडिंग प्रयोग (LEX), रिटर्न उड़ान प्रयोग (REX) और स्क्रैमजेट प्रोपल्शन प्रयोग (SPEX) हैं।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन