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ISRO ने IRNSS सिरीज़ का आखिरी उपग्रह ‘IRNSS 1G’ ऑर्बिट में स्थापित किया

भारतीय अंतरिक्ष शोध संस्थान (ISRO) ने भारतीय क्षेत्रीय नैविगेशन उपग्रह सिस्टम (IRNSS) सिरीज़ का सांतवां व आखिरी उपग्रह ‘IRNSS 1G’ सब जियोसिंक्रोनस ट्रांस्फ़र ऑर्बिट (Sub-GTO) में सफलतापूर्वक स्थापित किया। लांच श्रीहरीकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के PSLV-C33 द्वारा 12:50 PM IST पर किया गया। साथ ही, ये PSLV (पोलर उपग्रह लांच वाहन) की यह 35वीं सफल उड़ान थी, और इससे पहले के छः उपग्रह भी इसी से लांच किये गये थे।

IRNSS 1G एक 1425 किलो का उपग्रह है, जो कि भारत की क्षेत्रीय नैविगेशन सिस्टम-IRNSS का सात उपग्रहों का कॉन्स्टेलेशन पूरा करेगा। इससे भारत US, रूस, चीन जैसे उन देशों की श्रेणी में आ जायेगा, जिनके पास अपने खुद का विकसित किया नैविगेशन सिस्टम है।

इस सिरीज़ के पिछले उपग्रह IRNSS 1A, IRNSS 1B, IRNSS 1C, IRNSS 1D, IRNSS 1E और IRNSS 1E से जुलाई 2013 से लांच करे जा रहे हैं। इनमें से IRNSS 1E और IRNSS 1F को इसी जनवरी और मार्च में लांच किया गया था।

IRNSS 1G की उसे पुराने संस्करणों के जैसी ही कंफ़िगरेशन है, जहां दो पेलोड उपस्थित हैं, एक नैविगेशन पेलोड और रेंजिंग पेलोड। IRNSS 1G का नैविगेशन पेलोड उपभोगताओं को नैविगेशन सेवा के सिग्नल उपलब्ध करायेगा। ये पेलोड L5 बैंड और S-बैंड पर कार्य करेगा।

उपग्रह के नैविगेशन पेलोड का ऐक बहुत ही सही रुबीडियम परमाणू घड़ी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। IRNSS 1G के रेंजिंग पेलोड में एक C-बैंड ट्रांस्पॉन्डर हैं जो कि उपग्रह की रेंज को सही सही बताता है।

ISRO अधिकारी के मुताबिक, आखिरी उपग्रह के सफल लांच के बाद? कॉन्स्टेलेशन को आने वाले तीन से छः महीनों तक स्थायी किया जायेगा, जिसके बाद इनका प्रयोग होगा।

साथ ही, ISRO ने आपातकालीन स्थितियों के लिये दो उपग्रह स्पेयर में रखे हैं। साथ ही, बेंगलुरु में इसका मुख्य नियंत्रण केंद्र बनाया गया है और देश भर में ट्रैकिंग स्टेशन बनाये गये हैं, जो कि सिस्टम को संपूर्ण बनाते हैं।

IRNSS दो तरह की सेवा उपलब्ध करायेगी- एक तो स्टैंडर्ड पोज़िशनिंग सेवा (SPS) जो कि सभी उपभोगताओं को उपलब्ध करायी जायेगी और दूसरी रिस्ट्रिक्टेड सेवा (RS), जो कि एक इनक्रिप्ट करी गयी सेवा है, जिसे केवल मान्यता प्राप्त उपभोगता प्रयोग कर सकते हैं।

उम्मीद करी जा रही है कि ये 20मि॰ (दुनिया में अभी सबसे कुटिल) से अधिक की ऐक्युरेसी से लोकेशन बतायेंगे, भारतीय और आस पास के 1500 किलोमीटर दूर तक के लोगों को। जहां भारत सरकार के मुताबिक ये सिस्टम किसानों और लेकों के लिये सही मौसम बताने के लिये प्रयोग किये जाने के लिय स्थापित की गयी है, परंतु इसको भारतीय फ़ौज भी अनेक कार्यो के लिये प्रयोग कर सकती है।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन