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प्रिडिक्टिव स्वास्थय तकनीक स्टार्टप Touckin को अपनी ऐप आधारित व्यक्तिगत स्वास्थ्य सेवा के लिए मिला $400K का निवेश

मोबाइल आधारित सोशल सेंसिंग के प्रयोग से प्रोऐक्टिव व्यक्तिगत केयर एनेबल करने वाले स्टार्टप Touchkin को सीड निवेश में $400,000 प्राप्त हुए हैं। निवेशकों में रघुनंदन जी (TaxiForSure के सह संस्थापक), अमित गुप्ता (InMobi के सह संस्थापक), हिमांशु अग्रवाल (Aspiring Minds के सी.ई.ओ.) अनुज श्रिवास्तव (Livspace के सी.ई.ओ.) और पुनीत अग्रवल (Moneyview के सह संस्थापक) जैसे नाम शामिल हैं।

Touchkin किसी भी स्मार्टफ़ोन पर डाउनलोड हो जाने वाले ऐप के ज़रिये व्यक्तिगत हेल्थकेयर सिस्टम उपलब्ध कराता है। यह मुख्यतः उन लोगों के लिये बनाया गया है, जो कहीं भी, कभी भी अपने प्रियजनों के स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहते हैं।

StayClose नाम की ऐप अपने आस-पास का डेटा सेंस कर के किसी व्यक्ति के ठीक होने की रियल समय विज़िबिलिटी उपलब्ध कराता है।

ये मोबिलिटी, ऐक्टिविटी, कम्युनिकेशन और नींद पैटर्न की नॉर्मैलिटी चेक करती है और असामान्य होने पर अइकॉन आम तौर पर लाल हो जाता है। ऐप तब भी नोटिफ़िकेशन भेजती है अगर ये चलन बहुत खराब हों।

हमारा मंच स्मार्टफ़ोन सेंसरों के पैसिव डेटा की सहायता से व्यक्ति के स्वास्थ्य की पिक्चर बनाता है और संभावित स्वास्थ्य परेशानियों को प्रिडिक्ट करते हैं। यह बहुत ताक़तवर है क्येंकि अधिकतम स्वास्थ्य ऐपों की तरह ये उपभोगता के कार्य में बदलाव नहीं मांगती।

Touchkin के संस्थापक जो अग्रवाल ने कहा।

Touchkin अपने प्रिडिक्शन इंजन के ज़रिये मशीन लर्निंग तकनीक के प्रयोग से बिहेवियर को समझ सकते हैं, जिससे उनके मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य को ख़तरे का पता चल सके।

मंच क्रॉनिक बीमारी वालों, वृद्धों और मानसिक रोग वालों और दूसरे अधिक रिस्क वाले उपभोगताओं को सिम्प्टमों की शुरवाती पहचान के लिये और प्रोऐक्टिव हेल्थकेयर उपलब्ध कराने के लिये केयर प्रोवाइडरों से सीधे जोड़ता है।

Touchkin में अपने निवेश के बारे में बताते हुए Livspace के सी.ई.ओ. अनुज श्रिवास्तव ने कहा:

Touchkin मशीन लर्निंग को स्वास्थ्य केयर में इस तरीके से प्रयोग कर रहे हैं, कि वो डिसरप्टिव साबित हो सकता है। यह देखना बहुत अच्छा लगता है कि कंपनियां भारत में ही वैश्विक प्रोडक्टों की शुरवात कर रही हैं।

Touchkin का दावा है कि अभी तक इनके मंच पर 3,000 पायलट उपभोगताओं के साथ, 300,000 इंटरैक्शन हो चुके हैं। साथ ही, ये यह भी कहते हैं कि ये अब तक 2 मिलियन बिहेवियर घंटे और 1 मिलियन सेंसिंग ईवेंट ट्रैक कर चुके हैं।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन