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Accel Partners ने दो नए फण्ड में जुटाए $2 बिलियन, स्टार्टअप्स में निवेश के लिए तैयार किया अलग फण्ड

भारत के सबसे बड़े निवेशकों मे से एक, Accel Partners ने अपने निवेशकों से $2 बिलियन का निवेश सत्र जुटाने में सफलता पायी है – जो कि यह देखते हुए एक बहतरीन राशि है कि उपभोगता दुनिया भर के निवेशक निवेश डालने में हिचकिचाने लगे हैं।

राशि को दो हिस्सों में बांटा गया है – जिनमें से छोटा $500 मिलियन का निवेश, सीड व ए सत्र के निवेशों के स्टार्टपों के लिये अलग किया जायेगा। इस फ़ंड को मुख्यतः US आधारित वेंचरों के लिये प्रयोग किया जायेगा। वहीं दूसरा बड़ा वाला $1.5 बिलियन का निवेश फ़ंड ऐसी बड़ी कंपनियों के लिये है, जो पहले ही लाभकारी बन चुकी हैं और दूसरे कारणों से निवेश जुटा रही हैं, जैसे कि विस्तार करने के लिये।

कंपनी ने गर्दन तोड़ गति से निवेश एकट्ठे किये हैं – दो महीने पहले शुरवात कर के। साथ ही, यह अपनी पिछली फ़ंडरेज़िंग से आधा बिलियन डॉलर ऊपर गये हैं।

TechCrunch से बात करते हुए फ़र्म के कुछ मेंबरों समीर गांधी, पिंग ली व रिच वांग ने अनेक मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किये।

इन्हें क्यों दो अलग-अलग हिस्सों की ज़रूरत है, पर समीर गांधी ने कहा कि दोनों भाग अलग-अलग प्रकार के निवेशों के लिये बनाये गये हैं, जिसके लिये अलग-अलग निवेश रणनीति की आवश्यक्ता है। इसी लिये दोनों हिस्सों को आपस में मिल कर दिक्कतें बढ़ाने से बचाने के लिये अलग-अलग हिस्सों में रखा गया है।

निवेश के साइज़ के बारे में बताते हुए गांधी ने कहा कि जहां कंपनी $500,000 से $8 मिलियन तक के छोटे निवेश सीड व ए सत्र के निवेशों में डालती है – छोटे?? – वहीं इन्हें ग्रोथ स्टेज की कंपनियों में $35 मिलियन के समीप निवेश करना बहतर लगता है। फिर भी, निवेश का साइज़ ऊपर-नीचे हो सकता है।

पिछले व इस फ़ंडरेज़िंग सत्र के बीच केवल दो वर्ष के अंतराल के बार में पिंग ली ने कहा:

हम बाज़ार के मध्य में रहना चाहते हैं, क्योंकि हमारा मानना है कि यहां अनेक बहतरीन आइडिया और उद्यमी हैं और 2016 तकनीक के लिये बहतरीन वर्ष होने वाला है। ऐसे में आप फ़ंडरेज़िंग करने में बाज़ार से बाहर रहकर समय बेकार नहीं करना चाहेंगे।

वहीं दूसरे साझेदार भी उत्साहित लगे और राय देते हैं की 2016 और 2017 उद्यमियों और नये आइडियाओं के लिये बहतरीन रहेंगे।

अमरीका पर अपने फ़ोकस को और भी दर्शाते हुए समीर गांधी ने कहा कि फ़र्म किसी भी ब्रेकाउट कंपने की ओर आकर्षित हो सकता है – और उसमें निवेश कर सकता है – भले ही वो विश्व के किसी भी हिस्से में हों। उन्होंने भारतीय ई-रीटेल कंपनी Flipkart का नाम उदाहरण के रूप में दिया।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन