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ई-कॉमर्स द्वारा सामान खरीदने पर लगाए गए 10% टैक्स पर Flipkart ने उत्तराखंड सरकार पर किया मुकदमा

सरकार द्वारा अनेक रोक लगाये जाने के बाद, अब फ्लिपकार्ट आक्रमक हो गया है। भारत की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों मैं से एक, फ्लिपकार्ट ने उत्तराखंड सरकार पर ऑनलाइन शॉपिग पर 10% कर लगाने के लिये मुकदमा ठोका है।

कंपनी के मुताबिक, स्टैंडर्ड कर 5% है, पर ऑनलाइन खरीदे गए सामानों पर 5% अधिक कर लगाया जा रहा है, जो कि प्रदेश के खुद के कर नियमों के विरुद्ध है।

पेटिशन के मुताबिक:

यह नयी स्कीम पक्षपाती है, जहां कॉमर्स के दूसरे माध्यम या कमर्शियल मोबिलिटी से ‘गुड्स’ की खरीद पर अधिक कर लगाया जा रहा है। यह UT Entry Tax Act का उल्लंघन है, जिसके तहत हर सामान पर समान कर लगता है, भले ही वो किसी भी माध्यम से खरीदा गया हो।

फ्लिपकार्ट की पेटिशन और भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस केस का लंबा प्रभाव पड़ेगा, न केवल उत्तराखंड पर, बल्की पूरे देश पर भी। जहां संभवतः उत्तराखंड से प्रभावित होकर महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक ने ई-कॉमर्स खरीदों पर एंट्री कर लगा दिया है, कई ऐसे प्रदेश हैं जो ई-रीटेलरों पर यह कर लगाने की राह पर हैं।

तो अगर नैनीताल हाई कोर्ट – जहां कंपनी ने पेटिशन डाली है – ने Flipkart के पक्ष में निर्णय सुनाया, तो पूरे देश का ई-कॉमर्स समुदाय इसे हाथों हाथ लेगा और यह दूसरे प्रदेशों के लिये भी उदाहरण के रूप में स्थापित होगा। परंतु अगर निर्णय उनके पक्ष में नहीं रहा तो Flipkart सुप्रीम कोर्ट तक यह मुद्दा लेकर जायेंगे।

मुद्दे पर बात करते हुए Flipkart के वक्ता ने ET को बताया:

यह अधिक कर पहले से दिये जाने वाले विक्रेताओं द्वारा सरकार को दिये जाने वाले कर से हट कर है। यह उत्तराखंड के उपभोगताओं के लिये सामान को 10% महंगा बना देता है, जिनके पास दरवाजे तक डिलिवरी के साथ एक जगह पर इतने सारे प्रोडक्ट मिलने के लिये यह एकमात्र स्थान हैं।

साथ ही, यह सामान के दाम भी बढ़ा देता है, जिससे सेल व रेवेन्यू देनों पर प्रभाव पड़ता है।

ख़ैर, दूसरी ई-कॉमर्स कंपनियां Flipkart बनाम उत्तराखंड सरकार के इस केस पर ख़बरें सुनने के लिये उत्साहित हैं, जिसकी सुनवाई अगले सप्ताह होगी। साथ ही, क्योंकि यह निर्णय सभी रीटेलरों के लिये बुरा है – किसे अधिक कर देना पसंद है – तो वे Flipkart के सपोर्ट में भी आगे आ सकते हैं।

पर देखने वाली बात यह भी है कि यह निर्णय बदलने पर यह अपना रेवेन्यू खो देंगे, इसलिये विविध सरकारें बिना प्रयास करे तो हीर नहीं मानेंगी। कॉर्पोर्रेट बनाम सरकार के युद्ध का पहला राउंड अगले सप्ताह शुरू हो रहा है, जहां फिर से जुडिशरी निर्णायक के रूप में दिखेगी।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन