खबर स्टार्टअप्स

अत्याधिक विस्तार के बाद OYO को निवेश आवश्यकताओं को पूरा करने में आई दिक्कतें

स्टार्टपों क लिये निवेश जुटाना मुश्किल हो रहा है, मुख्यत: क्षेत्र को बड़े-बड़े नामों के लिये। होटल ऐग्रिगेटर OYO Rooms को भी उनके लक्ष्य $400 मिलियन का चौथाई निवेश भी जुटा पाने में विफलता मिलने से उनके सच से सामना हो गया है।

इसलिये, कंपनी ने अपनी आवश्यक्ताएं कम कर अब अपने शुरुआती लक्ष्य का चौथाई निवेश जुटाने का ही निर्णय लिया है, मुख्यतः इनके सबसे बड़े निवेशक SoftBank से। कंपनी सूत्रों ने Economic Times को बताया:

उन्होंने (OYO) बाज़ार का परीक्षण कर के देखा है, और कोई निवेशक नहीं मिल रहा (SoftBank) ने कदम उठाया है और शायद वह कंपनी में $50-80 मिलियन का निवेश करें।

कंपनी इस निवेश के साथ, संभवतः $400 मिलियन का मूल्याकंन भी साध रही थी।

अपने साधे हुआ लक्ष्य तक न पहुंच पाना, कंपनी के लिये बहुत महत्वपूर्ण समय पर आया है। Oyo, Zo rooms को अधिग्रहण के मध्य में है और इसमें उनकी 7 प्रतिशत एक्विटी लगने की संभावना है। फिर भी, कुछ शेयरहोल्डर डील के लिये दिक्कतें बनाने के प्रयास में हैं और Oyo के $400 मिलियन के लक्ष्य तक पहुंच पाने में असक्षमता इनके कार्य को आसान बना देगी।

भले ही इसकी घोषणा एक महीने पहले ही कर दी गयी है, और व्यापार और वर्कफ़ोर्स Tiger Global द्वारा बैक्ड ZO द्वारा हैंडोवर कर दिया गया है, Oyo ने अभी तक डील को पूरा करने वाले अधिकारिक कागज़ नहीं साइन किये थे।

Zo और Oyo, दोनों के ही डील पर बयान देने से मना कर दिया है।

निवेश जुटाने में दिक्कतें केवल Oyo के साथ नहीं हैं। बाज़ार पहले से निवेश के मामले में धीमा पड़ रहा है – उदाहरण के लिये Morgan Stanley का Flipkart में 27% हिस्सा कम करना।

फिर भी, इससे भी Oyo के लिये चीज़ें मुश्किल हो जाती हैं कि इनके प्रतिद्वंदियों iBibo और MakeMyTrip, दोनों ने बहुत सा निवेश एकत्रित किया है और यह जल्द ही होटल ऐग्रिगेशन में विस्तार करने वाले हैं। Oyo भी दूसरे निवेशकों की खोज में है पर अभी SoftBank ही इनके मुख्य निवेशक है।

कंपनी ने अपनी उपस्थिती 3 शहरों से साल के अंत तक 165 कर ली। कंपनी, जो कि 165 शहरों की 4000 प्रॉपर्टियों में 45,000 कमरों से ऑपरेट कर रही है, और अब इन्हें विस्तार से पहले स्वयं सस्टेनेबल और लाभकरी बनने के प्रयास अधिक करने चाहिए।

Oyo का केस, इस बात के याद दिलाता है कि निवेशक कंपनी के बढ़ंत और रेवेन्यू से संभावनाओं को लेकर चिंतित हैं। और जहां भारतीय स्टार्टपों को पिछले वर्ष बहुत सा निवेश मिला है, वही अब निवेश मिलना मुश्किल हो रहा है, वो भी अधिक खर्च और साख की कमी के कारण।

Add Comment

Click here to post a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन