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गूगल अब ‘फ़्लड अलर्ट्स’ के ज़रिये भारतियों को अधिक बहती नदियों व बाढ़ के बारे में करेगा सूचित

Google ने भारत में अपने ‘Flood Alerts’ की घोषणा करी, जिससे वह ऐसे 170 से अधिक क्षेत्रों में बाढ़ व नदी के अधिक बहाव के बारे में सूचना देंगे, जहां केंद्रीय जल कमीशन (CWC) के सक्रीय ऑब्ज़र्वेशन स्टेशन हैं।

यह अलर्ट वेब खोज पर, Google App के Google Now cards पर, Google Maps में और Google Public Alerts होमपेज पर उपलब्ध हैं, और इन्हें डेस्कटॉप व मोबाइल डिवाइसों से देख जा सकता है। इन सूचनाओं को CWC द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार बनाया व प्रकाशित किया जायेगा।

ऐसे ही, 2015 में Google ने ‘Cyclone Alerts’ फ़ीचर शुरू किया था, जिससे भारत में चक्रवातों की जानकारी दे दी जाये। सूचना पर क्लिक करने से उपभोगता को डीटेल के साथ जानकारी मिलती है, जिसमें मैप व टाइमलाइन समेत दिक्कत का वर्णन हो। साथ ही यह आपको बचाव के तरीके भी सुझाता है।

‘Public Alerts’ के ज़रिये Google उपभोगताओं को ज़रूरी मौसम की जानकारी, पबलिक सुरक्षा व भूकंप से संबंधित जानकारी शेयर करते हैं, जिससे सभी उपभोगताओं को इनकी पहले से जानकारी हो और वह सीचित निर्णय ले सकें। उपभोगता सक्रीय अपडेट को लिये google.org/publicalerts पर जा सकते हैं, और प्रश्न को मुताबिक, उपभोगताओं को यह अपडेट Google Maps पर भी उपलब्ध होती है। किसी अपडेट पर क्लिक करने से उपभोगता को अलर्ट भेज रही संस्था की भी जानकारी मिलती है।

जहां खोज दानव दूसरे प्राकृतिक डिज़ास्टरों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराता है, बाढ़ शायद इस उपमहाद्वीप पर सबसे आवश्यक है। यहां पर पश्चिमी देशों के जैसे अच्छे सुरक्षा चेक नहीं हैं, जिसका वजह से अधिक बहती नदियों, डैम से बहते पानी की वजह से हज़ारों जानें जातीं हैं।

अंकों के मुताबिक, भारत में होने वाले सभी प्राकृतिक डिज़ास्टरों में सबसे आम बाढ़ ही है। बारिश के मौसम की सामयिक बाढ़ हर वर्ष करीब 30 मिलियन भारतियों के जीवन को प्रभावित करती है। केंद्रीय जल कमीशन (CWC) के मुताबिक, हर वर्ष करीब 7.21 मिलियन हेक्टेयर (करीब 72,000 स्क्वेयर किलोमीटर) ज़मीन बाढ़ के पानी के नीचे चला जाता है।

इस पानी से 3.78 मिलियन हेक्टेयर में बोई गयी रु1,118 करोड़ की फसल हर साल बर्बाद होती है। भारी बारिष व बाढ़ के कारण करीब 1,700 लोग हर साल अपनी जानें गवांते हैं। इसके साथ ही, हर साल यह बाढ़ें 1.25 लाख घर व 96,000 को करीब लाइवस्टॉक को बहा लो जाती हैं। परंतु, कमाल की बात को यह हे कि भारत की 60% बोने लायक ज़मीन, 66% लाइवस्टॉक व पूरे जंगल आज भी इन्हीं बारिशों पर अपने जीवन के लिये निर्भर हैं।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन