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माइक्रोसॉफ़्ट ने $250 मिलियन में नामी कीबोर्ड ऐप SwiftKey का किया अधिग्रहण

सत्या नडेला के मार्गदर्शन में Microsoft ने अनकों अधिग्रहण किये हैं, जिनमें टू-डू ऐप Wunderlist, कैलेंडर ऐप Sunrise व ई-मेल ऐप Accompli शामिल हैं।अपनी अधिग्रहण की इसी लहर को आगे बढ़ाते हुए, कंपनी ने नामी कीबोर्ड ऐप SwiftKey को भी ख़रीद लिया है।

माना जा रहा है कि यह Windows 10 के मोबाइल मंच के लिये Word Flow नामक स्मार्ट कीबोर्ड में कृत्रिम बुद्धी के प्रयोग को बढ़ाने के काम को ध्यान में रख कर उठाया गया कदम है।

इस समय लंदन, सैन फ़्रैंसिस्को व सियोल में 150 से अधिक SwiftKey कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। कंपनी के करीबी यह बताते हैं कि यह सभी अपने पद छोड़ कर Microsoft के तकनीक व डेवलपमेंट ग्रूप के वाइस प्रेज़िडेंट हैरी शुम के निर्देशन मे Microsoft Research से जुड़ जायेंगे।

लंदन स्थित SwiftKey, कृत्रिम बुद्धी के प्रयोग से प्रचलित प्रिडिक्टिव कीबोर्ड बनाने के लिये जानी जाती है। कमाल की बात तो यह है कि इनकी यह ऐप, जो एक समय में Google Play स्टोर व Apple स्टोर की लिस्ट में उच्च स्थान पर थी, केवल Android व iOS डिवाइसों के लिये उपलब्ध है।

ऐप, उपभोगता के लेखन के तरीके से सही-सही अगले शब्द की भविष्यवाणी कर लेती है। कंपनी के मुताबिक यह ऐप स्लैंग, छोटे नाम व उपभोगता को पसंद इमोशिकॉन भी याद कर सकती है। यह ये भी दावा करते हैं कि इन्होंने दो ट्रिलियन स्ट्रोकों व कुल 23,000 साल के लेखन समय को भी बचाया है।

इनके Android ऐप में 100 से ऊपर भाषाएं हैं, जिनमें अरबी, आइसलैंडिक, वेल्श व कई चीनी व भारतीय भाषाएं शामिल हैं। कंपनी ने स्टीफ़न हॉकिंग के लिये भी विशेष भाषा मॉडल बनाया है और उनके वीलचेयर से जुड़े कंप्यूटर को पॉवर करते हैं जिससे वह अपने लेक्चर व आर्टिकल लिख सकें।

फिर भी, कंपनी टिकाऊ व्यापार मॉडल बना पाने में सफल नहीं रह पायी है। शुरवात में ऐप $4 की मिलती थी, फिर इसे 2014 में मुफ़्त कर दिया गया और केवल थीम व पर्सनलाइज़ेशन को इन-ऐप पर्चेज़ के रूप में चार्ज किया जाने लगा।

कंपनी ने OnePlus, Samsung, Xiaomi व Blackberry से भी साझे करे हैं, जो इनकी ऐप को पहले से इंस्टॉल कर के दे रहे हैं। ऐप अभी 300 मिलियन डिवाइसों पर उपलब्ध है।

अनेक UK-बेस ऐक्विज़िशनों के मध्य, किसी भी UK की कंपनी के लिये यह बहुत बड़ी उपलब्धी है। गौर की बात है कि यह ऐक्विज़िशन कृत्रिम बुद्धी स्टार्टपों से संबंधित ही हैं।

पिछले साल कंप्यूटर व मनुष्य की बात को और रियलिस्टिक बनाने वाली ऐप VocalIQ को Apple ने खरीदा था। 2014 में €400 मिलियन में DeepMind को खरीदा था, जिसने आगे जाकर ऑक्स्फ़ोर्ड विश्वविद्यालय जनित Dark Blue Labs व Vision Factory को खरीद लिया।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन