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माइक्रोसॉफ़्ट भारत चेयरमैन ने सार्वजनिक क्लाउड इंफ़ेरास्ट्रक्चर के लिए सरकार की पॉलिसी पर उठाए प्रश्न

इलेक्ट्रॉनिक्स व इन्फ़ॉर्मेशन तकनीक विभाग (DeitY) ने हाल में ही क्लाउड सेवा उपलब्ध कराने वालों को पैनल में ला कर इन सेवाओं के विभागे द्वारा प्रयोग करने के लिये प्रपोज़ल के लिये निवेदन (RPF) डाला।

पर इसी को लेकर Microsoft भारत के चेयरमैन भास्कर प्रमाणिक ने इस प्रस्ताव की निंदा करी है और छोटे उद्यमियों के मुश्किल प्रजेक्ट चला पाने पर व सरकार के ऐसे उद्यमियों के प्रपोज़लों को जल्द मान्यता देने पर प्रश्न भी उठाये हैं।

Digital India का महत्वकांक्षी सपना पूरा करने के लिये भारत के अनेक विभागों और NIC समेत सेवाओं में पबलिक क्लाउड इंफ़्रास्ट्रक्चर (प्रजेक्ट मेघराज) लाना बहुत महत्वपूर्ण कदम है।

प्रमाणिक ने कहा कि पबलिक क्लाउड इंफ़्रास्ट्रक्चर बहुत हायपर-स्केलेबल, हायपर फ़्लेक्सिबल व बहुत सुरक्षित होना चाहिये और इस समये दुनिया में केवल तीन कंपनियां हैं-Microsoft, Amazon व Google- जो कि इस स्तर की सेकेलेबिल्टी, फ़्लेक्सिब्ल्टी व सुरक्षा उपलब्ध करा सकती हैं।

भारत में सभी को विकल्प चाहिये… सरकार कह रही है कि वह इसे सबके लिये खोलना चाहते हैं… पर इस क्षेत्र के खिलाड़ी बहुत ही बड़े हैं। उनके (छोटे खिलाड़ियों के) पास वैश्विक पहचान नहीं होगी।

प्रमाणिक ने कहा।

भारत समेत 40 क्षेत्रों में 100 डेटा सेंटर के लिये हाल ही में हुए $15 बिलियन के निवेश को लिकर प्रमाणिक ने कहा:

मुझे किसी भी एसी भारतीय कंपनी का नाम बताइये जो ऐसा कर पाने में सक्षम हो। हमें बहतर इवैल्युएशन प्रोसेस चाहिये और हमें यह समझना चाहिये कि उन्हें हायपर स्केल करना पड़ेगा वरना वे अपने NIC डेटा सेंटर से ही काम चला लें।

फिर भी, प्रमाणिक ने सरकारी प्रयासों के किसी निजी मंच पर चलने से जुड़े ख़तरों को भी माना। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि आधार प्रोजेक्ट Microsoft के सेंटर से चले। वे सिर्फ़ यह चाहते हैं कि RTI के अंतर्गत आने वाले सभी प्रोजेक्ट क्लाउड से चलाये जायें।

Microsoft भारत के चेयरमैन के इस बयान की कड़ी प्रतिक्रिया एक वरिष्ठ सराकरी अधिकारी नें ET को दी:

हम यहां किसी कंपनी की मांगें पूरी करने नहीं बैठे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार ने इंडस्ट्री के लोगों से पहले ही इस विषय पर दो बार चर्चा कर के ही इस RPF को ड्राफ़्ट किया, और, इसके पीछे का उद्देश्य था इस क्षेत्र में इतना प्रतिद्वंद उत्पन्न कर देना, जिससे आने वाले समय में यह सेवा मुफ़्त भी हो सके।

प्रमाणिक की टिप्पणी, भले ही तकनीकी रूप से सार्थक हो, को पूरी कम्युनिटी से प्रोत्साहन नहीं मिलेगा। यह मुख्यतः है, क्योंकि भारत सरकार भारतीय उद्यमों को बढ़ावा देना चाहती है और पश्चिमी दानवों पर सपोर्ट के लिये निर्भर नहीं रहना चाहती। और जहां, इतना बड़ा व मुश्किल स्ट्रक्टर बना पाना कठिन है, पर यह किसी भारतीय कंपनी के लिये पूरी तरह नामुमकिन नहीं है।

भारत सरकार मेघराज नाम का पबलिक क्लाउड इंफ़्रास्ट्रक्चर स्थापित करना चाहती है। पर सरकारी व निजी इंफ़्रास्ट्रक्चरों पर हर समय बढ़ रहे सायबर हमलों के कारण ऐसे नेट्वर्कों पर सुराक्षा एक बहुत बड़ा मुद्दा है, जिसका हल निकलना बाकी है। भले ही भारत सरकार के पास कोई क्लाउड इंफ़्रास्ट्रक्चर अडॉप्ट करने के लिये रणनैतिक मार्गदर्शन है, पर अब वे इन इंफ़्रास्ट्रक्चरों पर डाले जा सकने वाले प्रजेक्टों का विविध विवरण बना रहे हैं।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन