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माइक्रोसॉफ्ट भारत के चेयरमैन ने गलत तरीके से फ्री बेसिक्स को बढ़ावा देने के लिए फेसबुक की करी निंदा

अपने दोस्तों के TRAI को Free Basics के सपोर्ट में मेल भेजने के आपको Facebook पर नोटिफ़िकेशन बहुत मिल रहे होंगे, जो कि Facebook के अनुसार भारत में डिजिटल समानता को बढ़ावा देने का तरीका है। खैर, इसका उद्देश्य यह नहीं है, और अब माइक्रोसॉफ्ट के भारत चेयरमैन भास्कर प्रमाणिक ने भी फेसबुक के इस तरीके की कथित तौर पर निंदा करी है।

भास्कर प्रमाणिक ने हाल ही में Free Basics पर अपने विचार व्यक्त किये और इसे अनुचित व नेट न्यूट्रैलिटी के विरुद्ध बताया।

ET के साथ साक्षात्कार में प्रमाणिक ने कहा:

मुझे नहीं लगता कि जो Facebook कर रहा है वो नेट नेयूट्रैलिटी से संबंधित है। यह पहली बार के उपभोगताओं को इंटरनेट पर आने के लिये सहायता है और उन्हें इसे यही बुलाना चाहिये। पर इसे गंदा कर नेट न्यूट्रैलिटी का नाम देना गलत है।

उन्होंने आगे जोड़ा कि Fre Basics के साथ जो Facebook कर रहा है वो भले ही प्रशंसनीय हो, पर इसे नेट न्यूट्रैलिटी से जोड़ना गलत है।

Free Basics internet.org के अंतर्गत Facebook का नया कदम है, जिसे नेट न्यूट्रैलिटी के संबंध में भारत में निंदा का सामना करना पड़ा है। यह Free Basics का कम सुविधाओं वाले लोगों तक इंटरनेट की महत्वपूर्ण सुविधा ले जाने के ज़रिये कि तरह प्रचार कर रहे थे और इसे नेट न्यूट्रैलिटी के विरुद्ध नहीं मानते।

हाल ही में TRAI ने Reliance व Facebook के मध्य Free Basics को लेकर होने वाले एक साझे को तब तक के लिये रोक दिया जब तक यह प्रमाणित न हो कि यह नेट नेयूट्रैलिटी को विरुद्ध नहीं है।

TRAI ने उपभोगताओं से अलग अलग डेटा सेवाओं पर के अलग-अलग दाम होने के विषय में उनकी राय मांगी है, जिससे नेट न्यूट्रैलिटी के मतभेद फिर शुरू हो गये। इस विषय मे अपने विचार व्यक्त करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर है, जिसके बाद TRAI Free Basics के विषष में कोई भी फ़ैसला लेगी।

हाल ही में Facebook ने अपने मंच पर कैंपेन चलाना शुरू किया है, जिसमें वह उपभोगताओं को Free Basics के सपोर्ट में TRAI को मेल भेजने के लिये प्रोरित कर रहा है, क्योंकि यह-” भारत में डिजिटल समानता प्राप्त करने और एक बिलियन भारतियों को इंटरनेट पर उपस्थित संभावनाओं से जोड़ने का पहला कदम है।”

फिर भी, इसके विरोध में आवाज़ें आने लगी हैं, जो कि यह कहती हैं कि कैंपेन गुमराह करने वाला है और नेट न्यूट्रैलिटी को सपोर्ट नहीं करता।

और यही, भास्कर प्रमाणिक ने अपने बयान में स्पष्ट किया, कि जो Facebook कर रहा है, और नेट न्यूट्रैलिटी दोनों अलग चीज़ें हैं।

हमें बहुत ही स्पष्ट होना पड़ेगा, कि नेट न्यूट्रैलिटी का मतलब है कि सभी को एक जैसे लाभ या हानी हों। अगर उपभोगता को कुछ ऐप्लिकेशनों के लिये अधिक भुगतान करना पड़े और कुछ ऐप्लिकेशनों को मुफ़्त कर के उन्हें उन ऐप्लिकेशनों की ओर धकेला जाये तो इसमें नेट न्यूट्रैलिटी कहां है ?

उन्होंने सवाल किया।

Facebook हालाँकि शुरू से internet.org और अब Free Basics का बचाव करती आ रही है, और इसे नेट न्यूट्रैलिटी के विरुद्ध नहीं मानती है। मार्क ज़करबर्ग ने भी कई बार इस कदम का यह कह कर बचाव किया है कि Free Basics न उपभोगता और न ऑपरेटरों को कोई हानी पहुंचाता है, यह बस मूलभूत सुविधाएं मुफ़्त उपलब्ध कराने का उद्देश्य रखता है।

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यह साफ़ तरह से स्पष्ट हो गया है, की प्रौद्योगिकी विकास हमारी मानवता को पार कर चुका है |
अल्बर्ट आइंस्टीन